खुशवंत सिंह लिटफेस्ट का आगाज शुक्रवार को हुआ। सोलन के कसौली में देश भर की जानी-मानी हस्तियों से सजे मंच पर लेखक, अभिनेता और राजनीतिज्ञों ने विचार साझा किए। लिटफेस्ट की शुरूआत पूर्व राज्यसभा सदस्य अरुण शौरी ने की।
उन्होंने खुशवंत सिंह को जिंदादिल लेखक बताया। शौरी ने कहा कि खुशवंत सिंह बातों और शब्दों के जादूगर थे वो अपनी बात को बेहद सफाई के साथ कहते थे। बहुत सी महिलाएं उनकी लेखनी की कायल थी।
खुशवंत सिंह के बेटे राहुल सिंह ने कहा कि वे पाकिस्तान से भी लेखकों को लाना चाहते थे, लेकिन राजनीतिक रिश्ते सही न होने की वजह से यह संभव नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी लेखक की ओर से एक मेल भी उन्हें मिला है। जब तक रिश्ते सुधर नहीं जाते तब तक पाकिस्तान से किसी भी लेखक का आना मुनासिब नहीं है।
अब कैमरे के सामने ज्यादा सहज हैं महिलाएं : दिव्या दत्ता
अभिनेत्री दिव्या दत्ता ने कहा कि मौजूदा माहौल में फिल्म जगत में महिलाओं को ज्यादा आजादी मिली है। पहले फिल्मों में रोमांस पेड़ों के बीच होता था लेकिन अब यह सोच बदल गई हैं। महिलाएं खुद ऐसे अभिनय करने के लिए तैयार हैं जिसमें पुरानी अभिनेत्रियां झिझक महसूस करती थी।
उन्होंने कहा कि वे खुद अपनी पहली फिल्म में ऐसे एक सीन के दौरान असहज हो गई थी। लेकिन बाद में सबकुछ सामान्य हो गया। महिला पटकथा और लोगों की पसंद के अनुसार काम कर रही हैं। महिलाएं कैमरे के सामने ज्यादा सहज हैं।
विरोध न करने वाली महिला से होता है दुष्कर्म : शोभा डे
लेखक शोभा डे ने कहा कि दुष्कर्म एक ऐसा कृत्य है जो विरोध न कर सकने वाली महिला के खिलाफ होता है। यह किसी भी स्तर पर जायज नहीं ठहराया जा सकता है। समाज में महिलाओं को आजादी से बात कहने का अधिकार है। लेकिन महिलाएं आजाद हैं इसका किसी दूसरे को कोई अर्थ नहीं ढूंढना चाहिए।
उन्होंने कहा कि राम रहीम और आशा राम जैसे लोगों के सामने आने से महिलाओं पर हो रहे अपराध उजागर हुए हैं। महिलाएं दो तरह की हैं एक साधारण और दूसरी असाधारण महिला। साधारण महिलाएं अपने साथ हो रहे अन्याय को दबा जाती हैं और उसका प्रतिरोध नहीं करती हैं। जबकि उन्हें इसके लिए साहस दिखाना चाहिए।
शत्रुघन सिन्हा की पुस्तक खामोश पर हुई चर्चा
आखिरी सत्र में शत्रुघन सिन्हा की पुस्तक खामोश पर चर्चा हुई। खामोश शत्रुघन की जीवनी पर आधारित है और साहित्य में उनके आम इंसान से फिल्म जगह की बुलंदी तक पहुंचने का जिक्र है।
शत्रुघन सिन्हा ने कहा कि कसौली बेहद खूबसूरत जगह है। यहां साहित्य पर चर्चा अपने आम में मजेदार है। खामोश ने उन्हें फिल्म जगत में शोहरत दिलवाई है और इस साहित्य में वे अपने आप को जीवंत पाते हैं।
पहले दिन विजय तंखा, नीलिमा डालमिया अधर, पवन वर्मा, शोभा डे, दिव्या दत्ता, अमृता नारायण, अनंद पदमनाथन, एलिजाबेथ जेम्स, परिणय लाल, टीसीए राघवन ने विभिन्न विषयों पर अपने-अपने विचार साझा किए।