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अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिडार सर्वे के लिए मंडी पहुंची टीम, 15 जून तक होगा फाइनल

Mon, 31 May 2021 10:32 AM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला नेटवर्क, मंडी

सार

केंद्रीय बजट में इस एयरपोर्ट के निर्माण के लिए 1000 करोड़ रुपये का प्रावधान केंद्र सरकार ने कर रखा है। लिडार सर्वे हेलीकाप्टर की मदद से किया जाएगा। प्रदेश सरकार के आदेश मिलने के बाद पर्यटन विभाग ने लिडार सर्वे के लिए हाई पावर कमेटी का गठन किया है।
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प्रस्तावित एयरपोर्ट का मैप। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश के जिला मंडी की बल्ह घाटी में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिडार सर्वे के लिए टीमें मंडी पहुंच चुकी हैं। प्रदेश सरकार वैपकोस लिमिटेड जल शक्ति मंत्रालय के माध्यम से लिडार सर्वे करवाएगी। जिला प्रशासन को सूचित करते हुए इस टीम ने लिडार सर्वे के लिए 15 जून तक का समय मांगा है। दो चरणों में बनने वाले एयरपोर्ट का रनवे कुल 3150 मीटर लंबा होगा और यह प्रदेश का सबसे बड़ा हवाई अड्डा होगा।

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सर्वे से एयरपोर्ट के निर्माण की वास्तविक स्थिति का पता चलेगा। रनवे कितने मीटर का होगा और निर्माण के दौरान आने वाली भौगोलिक चुनौतियों को कैसे दूर करेंगे, निर्माण कार्य शुरू करने से पहले इन सबका पता लिडार सर्वे से लगाया जाएगा। सर्वे को करवाने के लिए शिमला में एक बैठक हो चुकी है। हाल ही में पेश किए गए केंद्रीय बजट में भी इस एयरपोर्ट के निर्माण के लिए 1000 करोड़ रुपये का प्रावधान केंद्र सरकार ने कर रखा है।

लिडार सर्वे हेलीकाप्टर की मदद से किया जाएगा। प्रदेश सरकार के आदेश मिलने के बाद पर्यटन विभाग ने लिडार सर्वे के लिए हाई पावर कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी को पर्यटन विभाग के संयुक्त निदेशक रॉबिन चार्ज की अध्यक्षता में बनाया गया था। बल्ह में बनने वाला यह इंटरनेशनल एयरपोर्ट मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का ड्रीम प्रोजेक्ट है। पर्यटन और सामरिक दृष्टि से हवाई अड्डा महत्वपूर्ण है। 
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लिडार सर्वे प्रोजेक्ट डिजाइन करने में होती है आसानी 
लिडार एक एडवांस तकनीक है। इसमें हेलीकाप्टर में लेजर से लैस उपकरण होते हैं। इस तकनीक के जरिये जमीन पर मौजूद हर एक चीज का डिटेल में विवरण मिलता है। जमीन पर रास्ता कैसा है, कहां गड्ढे हैं, कहां ऊंचाई है या फिर कहां नदी और नाले हैं, इन सब की सटीक जानकारी लिडार तकनीक से मिलती है। तकनीक की मदद से कॉरिडोर की लंबाई, चौड़ाई, अलाइनमेंट, स्टेशन, डिपो, जमीन की जरूरत का सटीक खाका तैयार होता है। इससे प्रोजेक्ट डिजाइन करने में आसानी होती है।

दो चरणों में 3500 बीघा भूमि पर बनेगा एयरपोर्ट
अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का निर्माण दो चरणों में होगा। पहले चरण में 2150 मीटर लंबा रनवे बनेगा, जिस पर 72 सीटर एटीआर विमान उतर सकेंगे। दूसरे चरण में रनवे को 1000 मीटर बढ़ाकर कुल 3150 मीटर लंबा किया जाएगा, जिसके बाद इस एयरपोर्ट पर 320 सीटर बड़े विमान लैंड कर सकेंगे। एयरपोर्ट के लिए कुल 3500 बीघा भूमि का इस्तेमाल होगा।

लिडार सर्वे के लिए 15 जून तक का समय मांगा है। एक टीम मंडी में पहुंचकर सर्वे की तैयारियों में जुटी है। सर्वे के लिए जिला प्रशासन हरसंभव मदद करेगा। उम्मीद है कि तय तिथि में यह अहम सर्वे हो जाएगा। - ऋग्वेद ठाकुर, उपायुक्त, मंडी

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