अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हमीरपुर की अदालत ने हत्या के मामले में आरोपी तीन नेपालियों को उम्रकैद और प्रत्येक को 20 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। यह हत्या नादौन पुलिस स्टेशन के तहत गांव जोलसप्पड़ में मार्च, 2016 में घटित हुई थी।
जिसमें रिंकु व अश्वनी (मामा- भांजा) को गंभीर रूप से घायल कर नेपाली नागरिकों ने मौत के घाट उतार दिया था। इस केस की पैरवी न्यायवादी सुदीप सिंह ने की है। जबकि मामले की छानबीन इंस्पेक्टर मोहिंद्र सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने की थी।
जानकारी के मुताबिक मार्च 2016 में होली के मौके पर विनय, पंकज, अश्वनी, रिंकु, सुभाष व अमित कुमार खेतों में बैठे हुए थे। इसी दौरान 3-4 नेपाली वहां पहुंचे और भांग मलने लग पड़े। उनके साथ रिंकु और सुभाष की बहस हो गई।
सभी नेपाली बहस के बाद अपने डेरे में चले गए। लेकिन करीब 7:30 बजे शाम डंडों, दराटों व कुल्हाड़ी के साथ करीब आठ नेपाली मौके पर पहुंचे और हमला कर दिया । नेपाली लोगों के रिंकु व अश्वनी को गंभीर रूप से घायल कर दिया।
साथियों ने रिंकु और अश्वनी को अस्पताल पहुंचाया। जहां डॉक्टरों ने रिंकु को मृत घोषित कर दिया। जबकि अश्वनी को चंडीगढ़ रेफर कर दिया। इसी बीच बंगाणा के पास रास्ते में उसकी भी मौत हो गई।
नादौन थाना में एफआईआर दर्जकर इंस्पेक्टर मोहिंद्र सिंह के नेतृत्व में आरोपियों को पकड़ लिया गया। पूरी छानबीन के बाद पुलिस ने कोर्ट में चालान पेश किया।
नरेश कुमार की अदालत ने तीनों नेपाली मूल के आरोपियों को दोषी मानते हुए उम्रकैद व प्रत्येक दोषी को 20 हजार रुपए जुर्माना भरने की सजा सुनाई है। आरोपी कोल्हापुर नेपाल क्षेत्र के हैं व वारदात के वक्त नाबालिग थे ।