leporad and monkey attack on people
चंद पिंजरों के सहारे वन विभाग, ठंड पड़ते ही निचले इलाकों में उतरे बंदर
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी के कई इलाकों में लोगों का अब घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। दिन के समय उत्पाती बंदर हमला कर रहे हैं तो रात के समय तेंदुए का खौफ सता रहा है।
कड़ाके की ठंड पड़ते ही जाखू, बैनमोर जैसे ऊंचाई वाले इलाकों से बंदर शहर के रिहायशी इलाकों और बाजारों में पहुंच गए हैं। भूूूखे बंदर लोगों पर हमला कर रहे हैं। वन विभाग के हाथ खड़े हैं। इनसे राहत दिलाने के लिए महकमे ने हेल्पलाइन सेवा तो शुरू की है, लेकिन इस पर शिकायत करने के बाद बंदरों को पकड़ने के लिए न तो पर्याप्त पिंजरे हैं और न ही मंकी कैचर। हालत तो यह है कि लोगों और पार्षदों की शिकायतों पर अब विभाग की तरफ से जवाब तक नहीं आ रहा। वहीं लगातार दूसरे साल शहर में बंदर पकड़ने के लिए विभाग को पिंजरे का सहारा लेना पड़ रहा है। बंदरों को पकड़ने के लिए दूसरे राज्यों से आने वाले मंकी कैचर इस बार भी शिमला नहीं आएंगे। पहले हर साल मेरठ से मंकी कैचर बुलाए जाते थे, लेकिन इस बार ये नहीं बुलाए गए हैं।
पार्षद पर हमला, शिकायत
की पर नहीं लगे पिंजरे
कसुम्पटी के परिमहल इलाके में अचानक दर्जनों बंदर पहुंच गए हैं। सोमवार को बंदरों ने रिहायशी इलाकों में कई लोगों से छीनाझपटी की। वार्ड पार्षद राकेश चौहान पर भी हमला कर दिया। पार्षद ने तुरंत महकमे के अफसरों से शिकायत की। लेकिन बंदर पकड़ना तो दूर, शिकायत का जवाब तक नहीं मिला। पार्षद ने सवाल उठाए कि वन विभाग शहरवासियों की परेशानी नहीं समझ रहा।
अफसरों का रटा रटाया जवाब, पकड़ रहे बंदर
शहर में बंदरों की समस्या पर वन विभाग का वही रटा रटाया जवाब मिल रहा है। वन्य जीव विभाग के डीएफओ रविशंकर ने बताया कि पीसीसीएफ की ओर से मिले टारगेट के अनुसार बंदरों को पकड़ने का काम जारी है।