मृतक बच्चे के माता-पिता।
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उपमंडल आनी की बखनाओ पंचायत के काथला गांव में मासूम रोणित को तेंदुए की ओर से मौत के घाट उतारने के बाद मां-बाप का रो रोकर बुरा हाल है। उसके पिता देतेंद्र कुमार और मां अपने जिगर के टुकड़े के खोने से बेसुध हैं। सोमवार रात करीब आठ बजे देतेंद्र कुमार की पत्नी ने जब अपने बेटे और बेटी को खाना खाने के लिए बुलाया तो आदमखोर तेंदुआ उनके छह वर्षीय बेटे पर झपट पड़ा। तेंदुआ रोणित को उठाकर जंगल ले गया। तेंदुए ने मासूम के शरीर के टुकड़े-टुकड़े कर उसे मौत के घाट उतार दिया। अभागे मां बाप अपने बच्चों के लिए खाना बनाकर उन्हें अपनी आंखों के सामने खिलाना चाहते थे लेकिन तेंदुए ने उनके अरमानों पर पानी फेर दिया। घटना के बाद मासूम के मां-बाप और बहन और एक भाई का रो-रोकर बुरा हाल है। सोमवार रात आठ बजे जैसे ही रोणित को तेंदुआ उठाकर ले गया, वैसे ही काथला गांव के ग्रामीण एकत्रित होकर जंगल की ओर निकल पड़े।
घर से करीब 150 मीटर की दूरी पर उन्हें खून के कुछ धब्बे मिले। फिर ग्रामीणों ने आठ से दस आदमियों के दल बनाकर जंगल में जगह-जगह रोणित को ढूंढने के लिए भेजे, पर सफलता नहीं मिल पाई। थके हारे ग्रामीणों ने आशा नहीं छोड़ी और रात खुलने के बाद मंगलवार को भी अभियान जारी रखा। दोपहर करीब 11 बजे घर से लगभग 600 मीटर की दूरी पर जंगल में छह वर्षीय रोणित के शरीर के टुकड़े क्षत-विक्षत हालत में मिले। इसे देखकर ग्रामीणों के हाथ पांव फूल गए। संवाद
तेंदुए को पकड़ा या मार दिया जाए : ग्रामीण
दलाश क्षेत्र में हर वर्ष जंगली जानवर बच्चों को अपना शिकार बना रहे हैं, जिसके चलते अब तक कई घरों के चिराग बुझ गए हैं। कुछ वर्ष पूर्व दलाश के गाड गांव में भालू ने दो सगे भाई बहन को अपना शिकार बनाया था। बीते वर्ष शिल्ली पंचायत के सुमा गांव में भी एक तेंदुआ एक बच्ची को उठा ले गया था। इन घटनाओं से क्षेत्र में भय का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि इस आदमखोर तेंदुए को जल्द पकड़ा जाए या फिर उसे मौत के घाट उतारा जाए, ताकि कोई दूसरी ऐसी घटना पेश न आए।