फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चालकों की जान के लिए आफत बनीं एलईडी लाइटें, आंखों पर असर

Sat, 18 Nov 2017 04:07 PM IST
राजेंद्र शर्मा/अमर उजाला, मौहल (कुल्लू)
विज्ञापन
विज्ञापन
मानकों को नजरअंदाज कर गाड़ियों में लगाई जा रही अतिरिक्त एलईडी लाइटें चालकों की आंखों पर प्रतिकूल असर डाल रही हैं। इनसे निकलने वाली तीखी रोशनी सीधे आंखों में पड़ती है जिससे कुछ देर के लिए आंखों के आगे अंधेरा छा जाता है।
विज्ञापन


आंखें चुंधिया जाने से एक तरफ जहां हादसे की आशंका बढ़ जाती है तो दूसरी तरफ कोमल आंखों में खारिश, जलन समेत एलर्जी के अन्य लक्षण पनप रहे हैं। कुल्लू में मोटर व्हीकल एक्ट को ताक पर रखकर ऑटो, बाइक, वैन, कार, बस, ट्रक समेत अन्य वाहनों की लाइटें अपने स्तर पर बदली जा रही हैं।

मन मुताबिक लगाई जा रही लाइटों की रोशनी बेहद तेज होती है। क्षेत्रीय अस्पताल के नेत्र विभाग में तैनात वरिष्ठ नेत्र विज्ञान अधिकारी कर्ण सिंह गुलेरिया कहते हैं कि ऐसी लाइट्स कोमल आंखों पर विपरीत प्रभाव डालती हैं।
विज्ञापन


संवेदनशील आंखें तीखी लाइट पड़ने से 30 सेकेंड के लिए ब्लैकआउट हो जाती हैं। पिछले कुछ समय से निजी व व्यावसायिक वाहन चालक आंखों में तकलीफ होने की शिकायत के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं। 
Trending Videos
विज्ञापन

डीआरएल नहीं है नुकसानदायक

आंखों में एलर्जी से परेशान चालकों को जांचने पर पता चला है कि उन्हें विपरीत दिशा से आने वाले वाहनों की तीखी रोशनी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसा लगातार जारी रहने से आंखों को और भी नुकसान हो सकता है।

उधर, एएसपी कुल्लू निश्चिंत सिंह नेगी ने कहा कि वाहनों में अतिरिक्त लाइटें लगाना मोटर व्हीकल अधिनियम का उल्लंघन है। इन लाइटों को तुरंत हटाया जाना चाहिए अन्यथा दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

नए मानकों के तहत तैयार बीएस-4 वाहनों के साथ एलईडी लाइटें लगकर आ रही हैं। इन्हें डीआरएल यानी डे टाइम रनिंग लाइट्स कहा जाता है। एलईडी होने के बावजूद इन लाइटों की रोशनी चुभती नहीं है।

इसके विपरीत जो लाइटें चालक अपने स्तर पर लगा रहे हैं, वह सस्ती होने के साथ साथ बेहद तेज रोशनी देती हैं। चूंकि इन लाइटों इस्तेमाल वाहनों के लिए नहीं होता, ऐसे में इनके दुरुपयोग से आंखों को नुकसान होता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें