मतगणना तक हिमाचल में लागू आचार संहिता में सरकार ने भारत निर्वाचन आयोग से कुछ राहत देने की मांग की है। सरकार का कहना है कि प्रदेश में कई सामान्य और सामान्य प्रशासन के ऐसे कार्य हैं, जिनकी वजह से आचार संहिता उल्लंघन नहीं हो सकता, लेकिन ऐसे मामलों की मंजूरी लेने में समय व्यय होता है। ऐसे में प्रशासनिक कार्यों को करने में आचार संहिता की छूट दी जाए।
प्रदेश के मुख्य निर्वाचन कार्यालय के माध्यम से भेजी गई इस चिट्ठी पर चुनाव आयोग विचार कर रहा है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी पुष्पेंद्र राजपूत ने बताया कि वैसे तो प्रदेश सरकार द्वारा किसी भी विभाग या कार्य के लिए मांगी जाने वाली अनुमति पर विचार कर आयोग अनुमति दे रहा है, लेकिन प्रशासनिक कार्यों में आयोग की मंजूरी लेने की बाध्यता से छूट के लिए सरकार की ओर से लिखा गया है।
कहा कि आयोग से जैसे ही इस संबंध में कोई निर्देश आएगा, उसके हिसाब से आगे कार्रवाई की जाएगी। दरअसल, वर्तमान में चुनावों के मद्देनजर पूरे प्रदेश में आचार संहिता लगी हुई है।
इस दौरान कोई भी सरकारी कार्य या निर्णय बिना चुनाव आयोग की मंजूरी के लागू नहीं हो सकता। इसी वजह से कई विभागों के कई छोटे बड़े मसलों पर फैसला लेने में अफसरों के भी पसीने छूट रहे हैं।
किसी भी निर्णय या आदेश को लागू करने से पहले चुनाव आयोग को प्रदेश निर्वाचन विभाग के माध्यम से अनुमति लेने की प्रक्रिया की वजह से समय ज्यादा लग रहा है। इसी को देखते हुए सरकार ने आयोग से आचार संहिता में छूट के लिए निवेदन किया है।