ट्रेनिंग कार्यक्रम में मौजूद महिला विधायक।
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महिला विधायकों को प्रशिक्षित करने के लिए धर्मशाला में चल रही कार्यशाला में उन्हें बताया कि अगर सफल नेता बनना है तो बातचीत के दौरान वे 70 फीसदी सुनें और 30 फीसदी ही बोलें। विधायकों को कार्यशाला के तीसरे और अंतिम दिन शुक्रवार को नेतृत्व निखार के गुर दिए गए। उन्हें ‘स्वदेश’ फिल्म के दृश्य दिखाकर भावनात्मक बुद्धिमता से सशक्त बनने के तरीके समझाए।
शी इज ए चेंजमेकर परियोजना के तहत आयोजित कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हरियाणा की 30 महिला विधायकों की नेतृत्व क्षमता और कौशल को निखारा गया। क्षमता निर्माण के उद्देश्य से यह कार्यशाला राष्ट्रीय लिंग और बाल केंद्र, लाल बहादुर शास्त्री नेशनल अकेडमी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन और राष्ट्रीय महिला आयोग के संयुक्त प्रयासों से आयोजित की गई।
शुक्रवार को भावनात्मक बुद्धिमता विषय पर करवाए गए सत्र में विधायकों को इफेक्टिव लिसनिंग (ध्यान से सुनने) के जरूरी टिप्स दिए गए। यह सत्र पार एक्सिलेंस लीडरशिप सोल्यूशंज कंपनी के सीईओ आर राजेश्वर उपाध्याय ने लिया। उन्होंने बताया कि एक सफल नेता बनने के लिए बोलने से ज्यादा सुनने की कला जरूरी है। इससे समाज में आपकी एक अच्छे नेता के रूप में छवि बनेगी।
भावनात्मक बुद्धिमता पर उन्होंने बताया कि सफल राजनीतिक जीवन के लिए जरूरी है कि अपनी भावनाओं को परिस्थितियों के अनुरूप ढालते हुए संबंधों में तालमेल बिठाया जाए। इसमें तथ्यों ही नहीं, बल्कि भावनाओं से भी काम लेना चाहिए। भावनात्मक बुद्धिमता के लिए स्वयं के प्रति जागरूकता, अपनी भावनाओं पर नियंत्रण, नेटवर्किंग बढ़ाने के लिए सामाजिक कौशल और दूसरों की खूबियों की तारीफ करना शामिल रहता है।
इस दौरान हमें अपनी भावनाओं के साथ-साथ दूसरों की भावनाओं की भी कद्र करनी चाहिए। तीन दिन तक चले इस कार्यक्रम में कुल 12 सत्र आयोजित किए गए। इनमें विषय विशेषज्ञों ने महिला विधायकों को सार्वजनिक जीवन में अनुशासन, डिसीजन मेकिंग, सेल्फ अवेयरनेस के मंत्र दिए। समापन समारोह में सभी प्रतिभागियों को भागीदारी के प्रमाण पत्र भेंट किए गए।