ऐसी स्थिति में इन नेताओं को कांग्रेस की एक छतरी के नीचे लाना हाईकमान के लिए बहुत बड़ी चुनौती होगी। वीरभद्र सिंह एक बड़े कद के नेता थे। पश्चिम बंगाल के पूर्व सीएम ज्योति बसु के बाद वीरभद्र सिंह देश में 22 साल के लंबे कार्यकाल तक छह बार मुख्यमंत्री रहे हैं। यही कारण है कि उनके निधन पर श्रद्धाजंलि देने के लिए शुक्रवार को खुद राहुल गांधी आनन-फानन में शिमला पहुंचे। राहुल गांधी इस बीच कांग्रेस के इन नेताओं की नब्ज भी टटोलेंगे।
हिमाचल प्रदेश में हर पांच साल में सरकार बदलने का ट्रेंड रहा है। कांग्रेस अगले साल सत्ता में अपनी बारी मान रही है। वहीं हिमाचल प्रदेश ने देश में भाजपा को बड़े नेता दिए हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा खुद हिमाचल से हैं। उनका पूरा ध्यान हिमाचल में भाजपा का मिशन रिपीट करवाने का होगा। पिछले दिनों केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के तौर पर अनुराग ठाकुर की ताजपोशी भी कहीं न कहीं अगले साल विधानसभा चुनाव को लक्षित कर की गई मानी जा रही है।
वीरभद्र सिंह के निधन के बाद भाजपा अपने मिशन रिपीट को आसान मानने लगी है। कांग्रेस के पास केंद्र और हिमाचल प्रदेश में सत्तासीन ताकतवर भाजपा से भिड़ने के लिए एकजुटता के अलावा और काई चारा नहीं होगा। और वीरभद्र सिंह के बाद सेकेंड लाइन के इन नेताओं में से कइयों को मुख्यमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा को छोड़ना होगा और किसी एक चेहरे को आगे कर चुनावी रणभूमि में उतरना होगा। वरना गुटों में बंटी कांग्रेस का रास्ता हिमाचल में कांटों भरा ही होगा।