हिमाचल में नेपाल मूल के नागरिकों को अब पंचायतों के परिवार रजिस्टर से बाहर किया जाएगा। यह फैसला राज्य पंचायती विभाग ने विधि विभाग के साथ विचार-विमर्श के बाद लिया है। जिन नेपालियों को हिमाचल में रहते हुए 25 साल से अधिक समय हो गया है, वे भी परिवार रजिस्टर में शामिल नहीं किए जा सकेंगे। इसके लिए नेपाली नागरिकों को पहले भारत की नागरिकता हासिल करनी होगी।
अखिल भारतीय नेपाली एकता समाज हिमाचल के महासचिव पिशल बुराथोकी की मानें तो राज्य में करीब 50 हजार नेपाली रह रहे हैं। इनमें से करीब 20 हजार नेपाली 25 साल से अधिक समय से हिमाचल में रह रहे हैं। करीब 10 हजार नेपाली परिवार रजिस्टर में दर्ज हैं। इनके नाम कटने शुरू हो गए हैं। बुराथोकी ने कहा कि यह गलत है और भारत-नेपाल के बीच हुई 1950 की संधि के अनुरूप नहीं है।
विधि विभाग ने हिमाचल पंचायती राज अधिनियम 1994, रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल एक्ट 1950 और सिटीजनशिप अधिनियम 1994 का अध्ययन कर राय दी है कि अगर कोई नेपाली नागरिक लंबे समय से किसी जगह पर रह रहा हो तो उसे सामान्य तौर पर परिवार रजिस्टर में दर्ज नहीं किया जा सकता है। कोई नेपाली मूल का व्यक्ति जो भारत का नागरिक नहीं है, तो उसे परिवार रजिस्टर में दर्ज नहीं किया जा सकता है।
पंचायती राज विभाग ने इस पर विधि विभाग की राय ली। इसके मुताबिक जो नेपाल मूल के लोग भारत के नागरिक नहीं हैं, वे परिवार रजिस्टर में दर्ज नहीं होंगे। चाहे वे यहां 25 साल से अधिक समय से भी क्यों नहीं रह रहे हों।
- केवल शर्मा, संयुक्त निदेशक, राज्य पंचायती राज विभाग