उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राजस्थान के राज्यपाल रहे दिवंगत कल्याण सिंह के पास 28 जनवरी से 11 अगस्त 2015 तक हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल का अतिरिक्त कार्यभार रहा। उनके पास हिमाचल के राज्यपाल का अतिरिक्त कार्यभार आया तो उन्हें उस वक्त बजट सत्र में परंपरा के अनुसार अभिभाषण पढ़ना था और इसमें राज्य सरकार की उपलब्धियां गिनानी थीं। तब प्रदेश में वीरभद्र सरकार थी। उन्होंने कुछ पंक्तियां पढ़कर ही अपने अभिभाषण को पढ़ा हुआ मान लेने की बात की थी। इससे हिमाचल विधानसभा में अभिभाषण पूरा नहीं पढ़ने की नई परंपरा स्थापित हुई, जैसी पहले नहीं थी। इसी परंपरा का पिछले राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने भी निर्वहन किया तो विपक्ष ने खूब हंगामा किया। हालांकि कल्याण सिंह के हिमाचल के कार्यवाहक राज्यपाल रहते भाजपा ही विपक्ष में थी तो तब इसका विरोध नहीं हुआ।
राज्यपाल ने कल्याण सिंह के देहांत पर जताया शोक
वहीं, राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने कल्याण सिंह के निधन पर दुख व्यक्त किया है। उन्होंने शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। बता दें लंबे समय से बीमार चल रहे कल्याण सिंह का शनिवार को निधन हो गया। बीते दो दिनों से कल्याण सिंह की तबीयत काफी नाजुक बनी हुई थी। अलग-अलग विभागों के विभागाध्यक्ष लगातार उनकी निगरानी रख रहे थे। अस्पताल में पूर्व मुख्यमंत्री के परिजन भी मौजूद थे। कल्याण सिंह के इलाज में दिल, गुर्दा, डायबिटीज, न्यूरो, यूरो, गैस्ट्रो और क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग समेत 12 विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम लगातार निगरानी में लगी हुई थी।