भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी रेल लाइन के लिए किए जाने वाले भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में पेच फंसने से थापना से बिलासपुर तक पूरी तरह से निर्माण कार्य शुरू करने के लिए इंतजार और बढ़ गया है। थापना से बिलासपुर के डियारा तक के कुछ भू-मालिकों ने अधिग्रहण प्रक्रिया को कोर्ट में चुनौती दी थी। उनकी अपील की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने फैसला दिया है कि उन सभी को जमीन और घरों के अधिग्रहण में राहत देने के लिए अधिग्रहण की प्रक्रिया को नए सिरे से शुरू किया जाए।
अपीलकर्ताओं ने उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी कि रेलवे की भूमि अधिग्रहण इकाई ने उनकी जमीन और घरों के अधिग्रहण के लिए सेक्शन 11(1) की पब्लिकेशन 19 फरवरी 2022 को जारी की थी। जबकि सेक्शन 19 की अधिसूचना 1 मार्च 2023 को की गई। इस अधिसूचना को 11(1) की पब्लिकेशन के बाद 12 माह के भीतर जारी करना होता है। लेकिन इसे समयसीमा के बाद अधिसूचित किया गया। इसी को लेकर भू-मालिकों ने कोर्ट से स्टे लिया था। उस मामले में अब उच्च न्यायालय से फैसला आया है। कोर्ट ने कहा है, जो सेक्शन 19 की अधिसूचना हुई थी, वह सेक्शन 11(1) की पब्लिकेशन के बाद एक साल के भीतर नहीं हुई थी।
कोर्ट ने कहा है कि जिन भू-मालिकों ने कोर्ट में अपील की थी, उनकी भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया दोबारा की जाए। बताते चलें कि जो भूमि मालिक मामले को लेकर कोर्ट गए थे, उन्हें ही कोर्ट ने घर और जमीन के अधिग्रहण में राहत देने के निर्देश सरकार और रेल विकास निगम को दिए हैं। जिन लोगों को राहत देने के आदेश हुए हैं उनकी कुल भूमि करीब 13 बीघा है। जबकि थापना से बिलासपुर के डियारा तक करीब 14 गांव की 62.18 बीघा भूमि का अधिग्रहण बाकी है। संवाद
कोर्ट ने कहा है कि अपीलकर्ताओं की जमीन और घरों के अधिग्रहण के लिए राहत दी जाए। इस मामले में हमने लॉ विभाग से कानूनी सलाह मांगी है। वहां से जवाब आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। उसके बाद ही फैसला लिया जाएगा कि इस मामले को लेकर अपील में जाना है या दोबारा से भूमि अधिग्रहण करना है। - अभिषेक कुमार गर्ग, भूमि अधिग्रहण अधिकारी,भानुपल्ली-बिलासपुर रेल लाइन