हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिल की सैंज घाटी में पिन पार्वती नदी में आई बाढ़ के बाद हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं। सैंज-न्यूली सड़क रोपा नामक जगह से आगे बंद होने से शैंशर व देहुरीधार पंचायत सड़क से नहीं जुड़ पाई है। न्यूली-शैंशर सड़क बंद होने से लोगों को राशन के बाद अब गैस सिलिंडर घोड़े व खच्चरों पर 20 किलोमीटर दूर पहुंचाने पड़ रहे हैं। प्रति सिलिंडर ढुलाई के 500 रुपये देने पड़ रहे हैं। इससे पहले भी लोगों ने राशन घोड़ों व खच्चरों पर लादकर अपने घरों तक पहुंचाया था। शैंशर व देहरीधार पंचायत के गांव तुंग, तल्हारा, सिंहण, धारा देहुरा, बजाहरा, खाईण, पटाहरा आदि में रसोई गैस खत्म हो गई है। घरों में लकड़ी का कम इस्तेमाल होने के चलते लोग रसोई गैस के लिए भटक रहे हैं। मजबूरी में लोग 20 किलोमीटर दूर से घोड़े व खच्चरों पर सिलिंडर लाने को मजबूर हैं।
घाटी में तुंग गांव के आलम चंद पालसरा, गिरधारी लाल, सिंहण गांव के राम लाल, तलाहरा गांव के बुद्धि सिंह, मीरा बाई, बनाहरा गांव के ठाकुर दत्त, तुंग गांव के माघु राम, खाईण गांव के रोशन लाल, चनाइड़ी गांव के अजय कुमार और विजय कुमार ने कहा कि न्यूली-शैंशर सड़क जुलाई के दूसरे सप्ताह में भारी बारिश के चलते हुए भूस्खलन के कारण बंद हो गई थी। लोगों के घरों में रसोई गैस के सिलिंडर खाली हो चुके हैं। पहले लोगों ने घोड़े व खच्चरों पर राशन अपने घरों तक पहुंचाया। अब प्रति सिलिंडर 500 रुपये ढुलाई देनी पड़ रही है। लोक निर्माण विभाग ने बंद पड़ी सड़क को अभी तक बहाल नहीं किया है। वहीं किसानों व बागवानों को अपने उत्पाद मंडियों तक लाने में भी परेशानी आ रही है। ग्रामीणों ने मांग उठाई है कि सड़क को जल्द दुरुस्त कर ग्रामीणों को राहत प्रदान की जाए। इस संबंध में एसडीएम बंजार हेमचंद वर्मा ने कहा कि उपमंडल में सड़कों को ठीक करने का कार्य चला हुआ है। न्यूली-शैंशर सड़क को लेकर संयुक्त निरीक्षण किया जाएगा।