भगवान नरसिंह की पांचवीं और अंतिम जलेब
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अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव के छठे दिन भगवान नरसिंह की पांचवीं और अंतिम जलेब निकाली गई। जलेब में आठ देवताओं ने लाव-लश्कर के साथ शोभा बढ़ाई। शाम पांच बजे के बाद निकाली जलेब में ढोल-नगाड़ों की थाप पर देवताओं के साथ देवलू झूमे। भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह भी पालकी में सवार हुए।
जलेब को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ी। देवताओं के साथ देवलुओं को वाद्ययंत्रों की थाप थिरकने से ढालपुर का माहौल खुशनुमा बन गया। इससे पहले राजा की चानणी से जलेब की शुरूआत हुई। सबसे आगे भगवान नरसिंह की घोड़ी चली। उसके पीछे जलेब का काफिला चला।
जलेब कुल्लू अस्पताल सड़क से, कॉलेज चौक, पुराने एसबीआई पार्क, कलाकेंद्र के पीछे से ढालपुर चौक होते हुए वापस राजा की चानणी में समाप्त हुई। इसमें महाराजा कोठी के आराध्य देवता जमदग्नि ऋषि, हवाई के देवता जमदग्नि ऋषि, रैला के देवता लक्ष्मी नारायण, लोट के देवता वीरकैला, जोंगा के देवता महावीर और कमांद के देवता वीर कैला आदि ने लाव-लश्कर के साथ भाग लिया।
जलेब जहां से गुजरी वहां पर भव्य नजारे को देखने के लिए लोग उमड़ पड़े। लोगों ने इस नजारे को कैमरों में भी कैद किया। खास बात यह रही कि सोमवार को जलेब में शामिल होने वाले देवता जलेब में दूसरी बार शामिल हुए। मान्यता है कि दशहरा उत्सव में नरसिंह भगवान की पांच दिन जलेब निकलती है। जलेब से नरसिंह भगवान पूरे ढालपुर मैदान में रक्षा सूत्र बांधते हैं।