प्रदेश के लाखों परिवार खेती-बागवानी से अपनी आजीविका चलाते हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में खेती और बागवानी के अधिकांश कार्य मशीनों के माध्यम से किए जाते हैं। स्प्रे मशीन, पावर टिलर, घास काटने की मशीन, लकड़ी काटने के उपकरण, पानी की मोटरें और कई अन्य कृषि यंत्र पेट्रोल व डीजल से संचालित होते हैं। ऐसे में यदि किसानों और बागवानों को कैन या अन्य पात्रों में ईंधन उपलब्ध नहीं होगा तो उनके लिए इन मशीनों का उपयोग करना कठिन हो जाएगा। राठौर ने कहा कि पहाड़ी प्रदेश होने के कारण हिमाचल की परिस्थितियां मैदानी राज्यों से अलग हैं। प्रदेश के अधिकांश बाग और खेत दूरदराज तथा दुर्गम क्षेत्रों में स्थित हैं, जहां तक वाहन या मशीनें सीधे पेट्रोल पंपों तक नहीं पहुंच सकतीं।
किसान आमतौर पर कैन में पेट्रोल या डीजल भरवाकर अपने खेतों और बागानों तक ले जाते हैं। अब यदि उन्हें यह सुविधा नहीं मिलेगी तो कृषि और बागवानी कार्यों पर सीधा असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से सेब सीजन और अन्य फसलों के महत्वपूर्ण समय में इस तरह की पाबंदियां किसानों की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं। प्रदेश के राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी के समक्ष भी इस विषय को उठाया है और जिलाधीश शिमला से भी इस संबंध में चर्चा हुई है। राठौर ने कहा कि यह केवल एक विभाग या राज्य का मामला नहीं है, बल्कि किसानों और बागवानों के हितों से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है, इसलिए प्रदेश सरकार को केंद्र सरकार के समक्ष इस विषय को प्राथमिकता से उठाना चाहिए और किसानों के लिए राहत सुनिश्चित करनी चाहिए।