समरहिल के जंगल में वर्ष 2009 में लगी आग में झुलस गया था शेरू, तब से कुफरी जू में गुजार दिए 19 साल
जवानी में हुआ करता था जू की शान, अब भी है स्वस्थ दीक्षा सरोय
शिमला। समरहिल के जंगल में लगी भीषण आग ने वर्ष 2009 में एक नन्ही सी जान को बेसहारा कर दिया। तब एक महीने का यह तेंदुआ शावक जले हुए पंजों के साथ जंगल में अकेला मिला था।
आग में उसका परिवार बिछड़ गया था और वह खुद बुरी तरह झुलस गया था। जवानी में शेरू जू में मुख्य आकर्षण का केंद्र हुआ करता था। दूर-दूर से लोग सिर्फ शेरू को देखने आते थे। आजकल फिर से शहर के जंगल दहक रहे हैं, शेरू का यह जीवन उन लोगों के लिए सबक है कि जिनकी एक भूल से जंगल में लगी आग किसी जानवरों को नुकसान पहुंचाती है।
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वन विभाग की टीम ने शेरू को रेस्क्यू कर कुफरी जू लाया। जू अटेंडेंट प्रमोद, मामराज और बाबू राम ने उसे अपने कमरे में रखा तथ उसके जले हुए पंजों की मरहम पट्टी की। स्टाफ ने प्यार से उसका नाम शेरू रखा। उस समय नन्हे शेरू को रुईं के साथ दूध पिलाया जाता था और कर्मियों ने प्यार तथा देखभाल से नन्हे शावक की जान बचाई। इसके बाद जैसे-जैसे शेरू बड़ा हुआ फिर उसे पिंजरे में छोड़ा गया। पिंजरे में ही शावक शेरू बुजुर्ग हो गया। समरहिल के जले जंगल से शुरू हुआ शेरू का सफर अब कुफरी जू में 19 साल का हो गया है। नन्हें, डरे-सहमे शावक से वह अब जू का सबसे बुजुर्ग तेंदुआ बन चुका है। वरिष्ठ वन रक्षक संजीव ठाकुर ने बताया कि शेरू अब बुजुर्ग हो चुका है और ज्यादा चल-फिर नहीं पाता। शेरू की दिनचर्या में सुबह 9:00 बजे पिंजरे से बाहर निकाला जाता है। इसके बाद दिनभर शेरू पिंजरे में घूमता रहता है। शाम के समय उसे चिकन और मटन का डाइट दिया जाता है। इसके साथ ही हर मंगलवार को पाचन सही रखने के लिए इसका व्रत होता है। जू प्रबंधन के मुताबिक शेरू अब 19 साल का हो गया है और उम्र के इस पड़ाव पर उसकी खास देखभाल की जा रही है।
शेरू की कहानी जंगल की आग की त्रासदी के साथ इंसानी संवेदना और वन्य जीव संरक्षण की मिसाल भी है। समरहिल के जंगल से निकला वह शावक आज कुफरी जू की पहचान बन गया है। शेरू एक सेहतमंद बुजुर्ग तेंदुआ है जो दिया जाता है वह अच्छे से खा लेता है। प्रशिक्षित पशु विशेषज्ञ प्रतिदिन शेरू की स्वास्थ्य जांच करते हैं। इसके साथ ही रेंज अधिकारी, ब्लॉक अधिकारी, वन रक्षक और एनिमल अटेंडेंट इसकी पूरी निगरानी और देखभाल करते हैं। -विनीता भारद्वाज, रेंज वन अधिकारी वन्यजीव रेंज कुफरी