स्कूल परिसर में तैयार हर्बल गार्डन में 40 से अधिक औषधीय पौधे लगाए, छात्र आसानी से कर पाएंगे पहचान
विज्ञापन
मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने किया हर्बल का उद्घाटन संवाद न्यूज एजेंसी शिमला। राजधानी के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय मैहली में विद्यार्थियों को अब किताबी पढ़ाई के साथ पारंपरिक औषधीय पद्धति और जड़ी-बूटियों के बारे में भी जानकारी मिलेगी। इसके लिए स्कूल प्रबंधन ने परिसर में विशेष हर्बल गार्डन तैयार किया है। इस गार्डन में 40 से अधिक किस्मों के औषधीय पौधे लगाए हैं। पंचायतीराज एवं ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने शुक्रवार को हर्बल गार्डन का उद्घाटन किया।
स्कूल प्रबंधन के अनुसार हर्बल गार्डन तैयार करने का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय पारंपरिक औषधीय पद्धति के बारे में जानकारी देना है। इसके माध्यम से खासतौर पर आयुर्वेद और विभिन्न पौधों के औषधीय महत्व की बुनियादी जानकारी विद्यार्थियों को दी जाएगी। स्कूल प्रबंधन के अनुसार, फिलहाल गार्डन में करीब 40 किस्मों के औषधीय पौधे लगाए गए हैं। इनमें प्रमुख रूप से शतावरी, कस्तूरी, पत्थरचट्टा, गिलोय, केसर, एलोवेरा, तुलसी, नीम, अश्वगंधा और पुदीना समेत कई अन्य पौधे शामिल हैं। इसके अलावा कई अन्य औषधीय पौधे नौणी विश्वविद्यालय से मंगवाए गए हैं, जिन्हें भी गार्डन में लगाया जाएगा।
विज्ञापन
स्कूल में वर्तमान में करीब 350 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। अब इन विद्यार्थियों के लिए औषधीय पौधों की जानकारी किताबों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वह स्कूल परिसर में इन पौधों को प्रत्यक्ष रूप से देखकर उनकी पहचान करना भी सीखेंगे। विद्यार्थियों को अलग-अलग पौधों के नाम, उनके पारंपरिक उपयोग, महत्व और संरक्षण के बारे में जानकारी दी जाएगी। प्रधानाचार्य सुमन चंदेल ने बताया कि हर्बल गार्डन का उद्देश्य विद्यार्थियों को प्रकृति के करीब लाने के साथ उन्हें हिमाचल और भारतीय परंपरा में लंबे समय से इस्तेमाल की जा रही औषधीय वनस्पतियों से परिचित करवाना है। हर्बल गार्डन में लगाए पौधों की देखभाल में विद्यार्थियों को भी शामिल किया जाएगा। इससे उन्हें पौधों की पहचान के साथ-साथ उनके संरक्षण और रखरखाव का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा। स्कूल में समय-समय पर विद्यार्थियों को इन पौधों से जुड़ी जानकारी भी दी जाएगी ताकि वह इनके औषधीय और पर्यावरणीय महत्व को समझ सकें। आने वाले समय में गार्डन को और विस्तृत करने की योजना है। इसमें स्थानीय जलवायु में आसानी से विकसित होने वाली औषधीय प्रजातियों को भी शामिल किया जाएगा।
पौधे पारंपरिक औषधीय ज्ञान स्रोत : सुमन प्रधानाचार्य सुमन चंदेल ने कहा कि आसपास मौजूद कई पौधे केवल हरियाली का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि पारंपरिक औषधीय ज्ञान और जैव विविधता के महत्वपूर्ण स्रोत भी हैं। इस पहल से स्कूल परिसर में ऐसा शैक्षणिक वातावरण तैयार होगा, जहां विद्यार्थी देखकर, पहचानकर और पौधों की देखभाल करते हुए सीखेंगे। हर्बल गार्डन विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी, पर्यावरण संरक्षण और पारंपरिक ज्ञान के प्रति रुचि विकसित करने में भी मदद करेगा। उद्घाटन समारोह में जिला परिषद सदस्य ओम प्रकाश, उप निदेशक उच्च शिक्षा लेखराज भारद्वाज, उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा निशा भलूनी, स्कूल प्रधानाचार्य सुमन चंदेल समेत स्कूल के शिक्षक, एसएमसी सदस्य और अन्य लोग मौजूद रहे।