वैज्ञानिक डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि इंडोर गुच्छी को उगाने का प्रशिक्षण चुनौतीपूर्ण रहा है। इंडोर में एक सेंटीमीटर की गुच्छी तैयार की गई है। गुच्छी का बीज निदेशालय ने तैयार कर लिया है। इसे बेहतरीन और प्राकृतिक तौर पर से उगाने पर कार्य किया जा रहा है। गुच्छी प्राकृतिक तौर पर अप्रैल से जून तक वर्षा ऋतु में जंगलों सहित ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में तैयार होती है।
प्राकृतिक तरीके से तैयार करने का चल रहा प्रशिक्षण
खुंब अनुसंधान निदेशालय चंबाघाट के निदेशक डॉ. वीपी शर्मा ने बताया कि निदेशालय गुच्छी का बीच तैयार करने में सफल रहा है। पहले गुच्छी को इंडोर तैयार किया गया था, लेकिन अब इसे और बेहतरीन बनाने के लिए प्राकृतिक तरीके से तैयार करने पर आउटडोर प्रशिक्षण चल रहा है। अप्रैल तक इसका भी सफल प्रशिक्षण होने की उम्मीद है।