घरेलू हिंसा की घटनाएं रोकने को एक तंत्र स्थापित किया गया है। इसके तहत 15 दिन तक शिकायतकर्ता से महिला आरक्षी मोबाइल पर संपर्क या व्यक्तिगत रूप से मिलती है। शिकायतकर्ता से बात करने के बाद एक रिपोर्ट तैयार करती है। मामले के पर्यवेक्षण को एक व्हाट्सएप ग्रुप भी बनाया गया है। पुलिस रिपोर्ट में घरेलू हिंसा पाए जाने पर संबंधित एसएचओ को कार्रवाई के लिए मामला भेजा जाता है।
जिन मामलों में शिकायतकर्ता लगातार 6 महीने तक घरेलू हिंसा से मुक्त (डीवीएफ) हैं, उनका नाम सूची से हटा दिया गया। जिले में वर्ष 2019 तक इस तरह की 461 शिकायत कर्ताओं पर नजर रखी गई। 91 नामों को अब तक सूची से हटाया गया है।
पुलिस अधीक्षक डॉ. मोनिका ने बताया कि घरेलू हिंसा के मामलों में पुलिस फॉलोअप कर रही है। घरेलू हिंसा के मामलों में पीड़ित से समय-समय पर फोन और महिला आरक्षी के घर जाकर स्थिति का जायजा लिया जाता है। छह माह तक प्रक्रिया चलती है। सब कुछ सही पाए जाने पर घरेलू हिंसा की शिकार का नाम सूची से हटा दिया जाता है।