जबकि संबंधित दस्तावेजों पर हस्ताक्षर 17 मई को करवाए गए। आरोप है कि बाद में हस्ताक्षर लेकर पूरी प्रक्रिया को वैध दर्शाने का प्रयास किया गया। यह भी आरोप है कि जिस भूखंड के विरुद्ध ऋण स्वीकृत किया गया, उसकी कथित कीमत मात्र 44 हजार रुपये आंकी गई, जो बाजार मूल्य से काफी कम थी। शिकायतकर्ता ने इसे बैंकिंग नियमों की अवहेलना और मिलीभगत का स्पष्ट प्रमाण बताया है। अदालत के आदेश पर तत्कालीन शाखा प्रबंधक राजन मेहता, समीर सूद निवासी बैजनाथ और गारंटर नीरज कुमार निवासी उस्तेहड़ तहसील बैजनाथ के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। एएसपी कांगड़ा बीर बहादुर ने पुष्टि की कि न्यायालय के निर्देशानुसार धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस बैंक रिकॉर्ड, ऋण दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की गहन जांच कर रही है।