उन्होंने कहा कि बदलते समय के अनुरूप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डाटा साइंस, साइबर सुरक्षा और हरित प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में शिक्षा और शोध को बढ़ावा देना होगा। विश्वविद्यालय को रोजगारपरक पाठ्यक्रम, स्टार्टअप संस्कृति, इन्क्यूबेशन सेंटर, उद्योग-शैक्षणिक साझेदारी और इंटर्नशिप कार्यक्रमों को भी मजबूत करना चाहिए। जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास पर शोध बढ़ाने के साथ डिजिटल शिक्षा, वर्चुअल कक्षाओं, ई-लर्निंग और डिजिटल पुस्तकालयों को सशक्त बनाने की भी आवश्यकता बताई। राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोध अनुदान हासिल करने के लिए भी प्रयास तेज करने चाहिए।
प्रो-वाइस चांसलर को नहीं मिला बैठक में प्रवेश
शिमला। ईसी की बैठक के दौरान प्रो-वाइस चांसलर (प्रो-वीसी) के पद को लेकर विवाद सामने आया। बैठक से पहले कुछ छात्र प्रतिनिधियों ने राज्यपाल एवं कुलाधिपति कविंद्र गुप्ता को ज्ञापन सौंपकर प्रो-वीसी का पद समाप्त करने की मांग उठाई। उनका कहना था कि प्रो.वीसी प्रो. राजिंदर वर्मा का तीन वर्षीय कार्यकाल 3 जून को समाप्त हो चुका है। इसके बाद अब तक पुनर्नियुक्ति या कार्यकाल बढ़ाने का कोई आदेश जारी नहीं हुआ है। प्रो. राजिंदर वर्मा विश्वविद्यालय कोर्ट की बैठक में पहुंचे, लेकिन उन्हें बैठक में शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद में उनके पद को लेकर चर्चा तेज हो गई। विश्वविद्यालय कोर्ट के सदस्य विक्रांत झारटा ने कहा कि यदि प्रो-वीसी का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और पुनर्नियुक्ति का कोई आदेश जारी नहीं हुआ है, तो वह प्रो-वीसी कार्यालय और आधिकारिक वाहन का उपयोग किस अधिकार से कर रहे हैं।