साहित्यिक गोष्ठी में मीनाक्षी पॉल ने कविता कवि अटल के नाम और बाबा भलखू, अश्वनी कुमार ने वाणी विराम न लेती, दिनेश शर्मा ने चार फुट का चिरानी, डा. अनुराग विजयवर्गीय ने हम तुम क्या कर सकते हैं, वो ही है करने वाला, निर्मला चंदेल ने चलती का नाम गाड़ी, पौमिला ठाकुर ने पहाड़ी कविता सुनाई।
अंजलि दीवान ने यादें, गुप्तेश्वर नाथ उपाध्याय ने जो करना था वही किया, सतीश रतन ने गजल जो देखी वो बात लिखेंगे, डा. हेमराज कौशिक ने गांव की अनुगूंज, राकेश कुमार सिंह ने नजम न पास आने का मतलब न वो लफ्ज ए दूरी समझते हैं।
उमा ठाकुर ने खाली निगाहें, कल्पना गांगटा ने मां, पुष्प, बेटियां, वंदना राणा ने गजल अलफाज भले साथ नहीं देते प्रस्तुत की। इसके अलावा हेमराज कौशिक, सतीश रतन, कुलराजीव पंत, आत्मा रंजन, विद्यानिधि, सीताराम शर्मा, प्रियंबदा शर्मा, कौशल मुंगटा, शांति स्वरूप शर्मा, वंदना भागड़ा, रितांजलि हस्तीर और निर्मल चंदेल ने भी प्रस्तुति दी।