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Sirmour News: सतौन में 120 साल बाद कौरवों और पांडवों के वंशजों का आज होगा मिलन

Sat, 01 Jul 2023 02:24 PM IST
अरविन्द ठाकुर संवाद न्यूज एजेंसी, सतौन (सिरमौर)

सार

शाठी और पाशी भाइयों का ऐतिहासिक मिलन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाएगा। शाठी कौरव वंशज हैं, जबकि पाशी पांडव वंशज हैं। हिमालय के पहाड़ों को काली माता का निवास स्थान माना जाता है।
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धूमधाम से मनाया जा रहा शांत पर्व। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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सिरमौर के ट्रांसगिरि क्षेत्र के टटियाना में 120 साल बाद इतिहास की पुनरावृत्ति होगी। यहां प्राचीन महासू महाराज के मंदिर के प्रांगण में शनिवार को शाठी और पाशी का अनोखा मिलन होगा। करीब एक साल पहले कुल देवता महासू महाराज के सुंदर और भव्य मंदिर का निर्माण किया गया था। यह मंदिर गांव की सुंदरता को चार चांद लगा रहा है, जहां ठारी माता का शांत पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है।

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शाठी और पाशी भाइयों का ऐतिहासिक मिलन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाएगा। शाठी कौरव वंशज हैं, जबकि पाशी पांडव वंशज हैं। हिमालय के पहाड़ों को काली माता का निवास स्थान माना जाता है। काली माता का एक स्वरूप ठारी माता है। ग्रामीणों के मुताबिक माता को खुश और शांत रखने के लिए इस तरह के पर्व का आयोजन किया जा रहा है। महासू देवता के मंदिर और ठारी माता की मूर्तियों को फूलों की माला से सजाया गया है। दो क्विंटल फूलों से मंदिर की सजावट की गई है। इस शांत पर्व में दो दिन में 400 गांवों के 40,000 लोगों के इकट्ठे होने की उम्मीद है।

स्थानीय ग्रामीणों अनिल शर्मा, मायाराम शर्मा, ओम प्रकाश रमौल ने बताया कि यहां शांत पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। एक जुलाई को मुख्य कार्यक्रम रखा गया है, लेकिन अनुष्ठान 28 जून से शुरू हो चुके हैं। घर-घर का हरेक शख्स तैयारी में जुटा हुआ है। महासू महाराज और माता ठारी की अनुकंपा से टटियाना वासी चौंतरे में थाती-माटी के जागरण के महापर्व ‘शांत महायज्ञ अनुष्ठान’ आयोजित कर रहे हैं। एक और दो जुलाई को भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
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एक सदी बाद मनाया जा रहा पर्व 
शाठी-पाशी का चौंतरा माना जाने वाले टटियाना में एक सदी बाद यह शांत पर्व मनाया जा रहा है। गौरतलब रहे कि एक जुलाई को आयोजित होने वाले भंडारे में कमरऊ तहसील के अंतर्गत आने वाले गांवों के अलावा पांवटा और रेणुकाजी क्षेत्र के कई गांवों के ग्रामीण मौजूद रहेंगे। दो जुलाई को होने वाले भंडारे में शिलाई, जौनसार और शिमला क्षेत्र के लोगों के अलावा ठुंडु बिरादरी के हजारों लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। इससे पूर्व ग्रामीणों ने अपने अस्त्रों-शस्त्रों का जुलूस निकालकर पर्व का जश्न मनाया। 

550 साल बाद श्रीकृष्ण से मिलने आएंगे योगेश्वर महादेव
जिला कुल्लू विकास खंड आनी के एकमात्र कृष्ण मंदिर बटाला में 7 जुलाई को उनके भाई शिंगला के योगेश्वर महादेव पूरे 550 सालों बाद मिलने आएंगे। हजारों लोग इस ऐतिहासिक और  यादगार पल के साक्षी बनेंगे। साढे पांच सौ वर्ष पहले ठाकुर मुरलीधर को मूर्ति स्वरूप और शालीग्राम में शिंगला से लाकर बटाला में स्थापित किया गया था। अब साढ़े पांच सौ साल के बाद देवता योगेश्वर महादेव  ने अपने भाई मुरलीधर से मिलन की इच्छा जताई। इसके मद्देनजर 7 जुलाई को योगेश्वर महादेव अपने भाई  ठाकुर मुरलीधर से मिलने बटाला आएंगे। यहां दोनों देवताओं का महामिलाप होगा।

बताते चलें कि योगेश्वर महादेव महाराज की उत्पति श्रीमद्भागवत यज्ञ से मानी जाती है। शिंगला जिसका पुराना नाम शयपुरी है। शयपुरी के एक गांव उरु में एक किसान को हल लगाती बार देवता योगेश्वर महाराज का मोहरा मिला था। इसे बाद में रथ स्वरूप शिंगला में स्थापित किया गया था। शिंगला से योगेश्वर महादेव के कारदार पूर्णचंद शर्मा ने बताया कि शिंगला गांव में भगवान परशुराम ने लंबे समय तक विश्राम किया था और यहीं पर शालिग्राम रूप में नृसिंह भगवान और ठाकुर मुरलीधर की स्थापना की गई थी।

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