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हिमाचल प्रदेश: लाहौल-स्पीति के ऊंचे जंगलों में महफूज है दुर्लभ कश्मीर कस्तूरी मृग, शोध में हुआ बड़ा खुलासा

Fri, 06 Nov 2026 09:53 AM IST
Ankesh Dogra अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति की पट्टन घाटी के ऊंचे जंगल दुर्लभ कश्मीर कस्तूरी मृग के लिए सुरक्षित प्राकृतिक आवास साबित हो रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका 'ऑरिक्स' में प्रकाशित अध्ययन में 2,946 से 4,418 मीटर की ऊंचाई पर इसकी मौजूदगी दर्ज की गई है। 

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कश्मीर कस्तूरी मृग। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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लाहौल-स्पीति की पट्टन घाटी के ऊंचाई वाले जंगल संकटग्रस्त कश्मीर कस्तूरी मृग के लिए महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवास साबित हुए हैं। यहां 2,946 से 4,418 मीटर की ऊंचाई पर स्थित शंकुधारी वनों में इस दुर्लभ वन्यजीव की मौजूदगी दर्ज की गई है। इनमें चीड़, देवदार, स्प्रूस, फर और भोजपत्र जैसी प्रजातियों के जंगल शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका 'ऑरिक्स' में हाल ही में प्रकाशित एक अध्ययन में यह खुलासा हुआ है।

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शोधकर्ताओं ने हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले की पट्टन घाटी के अलावा उत्तराखंड के गोविंद पशु विहार राष्ट्रीय उद्यान में कश्मीर कस्तूरी मृग के आवास और उसकी दिनचर्या का अध्ययन किया। शोध में सामने आया कि दोनों क्षेत्रों में कस्तूरी मृग की वन आवासों को लेकर पसंद अलग-अलग है। पट्टन घाटी में शंकुधारी वन और अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र इसके लिए अनुकूल पाए गए, जबकि गोविंद पशु विहार में मिश्रित वन इसका पसंदीदा आवास हैं। यह अध्ययन भारतीय प्राणी सर्वेक्षण, भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून और स्विट्जरलैंड के स्विस फेडरल इंस्टीट्यूट फॉर फॉरेस्ट, स्नो एंड लैंडस्केप रिसर्च से जुड़े विशेषज्ञों अमीरा शरीफ, विनीत कुमार, हेमंत सिंह, भीम दत्त जोशी, चिन्नासामी रमेश, कैथरीन ग्राहम, मुकेश ठाकुर और ललित कुमार शर्मा ने संयुक्त रूप से किया है। अध्ययन के लिए दोनों क्षेत्रों में  सर्वेक्षण किया गया।

इसके तहत पट्टन घाटी में 43 और गोविंद पशु विहार में 23 कैमरा ट्रैप लगाए गए। इसके अलावा पट्टन घाटी में 54 और गोविंद पशु विहार में 43 वन्यजीव सर्वेक्षण मार्गों का निरीक्षण किया गया। अध्ययन के दौरान पट्टन घाटी में कस्तूरी मृग की मौजूदगी के 85 प्रमाण मिले, जबकि गोविंद पशु विहार में 37 प्रमाण दर्ज किए गए। इनमें खुरों के निशान जैसे कई संकेत शामिल थे। कैमरा ट्रैप में पट्टन घाटी में कस्तूरी मृग की 53 स्वतंत्र तस्वीरें मिलीं, जबकि गोविंद पशु विहार में आठ बार इसकी मौजूदगी दर्ज हुई। शोधकर्ताओं के मुताबिक पट्टन घाटी में कस्तूरी मृग की मौजूदगी अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मिलने की संभावना ज्यादा है। वहीं, गोविंद पशु विहार में भोजपत्र, बांज, फर और अन्य पेड़ों वाले मिश्रित वन इनके लिए महत्वपूर्ण पाए गए।

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कश्मीर कस्तूरी मृग संकटग्रस्त श्रेणी में 
कश्मीर कस्तूरी मृग को अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) की रेड लिस्ट में संकटग्रस्त श्रेणी में रखा गया है। इसके अस्तित्व पर सबसे बड़ा खतरा कस्तूरी की थैली के लिए होने वाला अवैध शिकार और प्राकृतिक आवास का नुकसान है। कस्तूरी का इस्तेमाल इत्र, औषधियों और धार्मिक कार्यों में किया जाता है।
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