झंडूता के शहीद हवलदार प्यार सिंह की पत्नी सुरेश कुमारी ने बताया कि बेटे को सरकारी नौकरी दी गई है। इनके परिवार का कहना है कि इनके घर तक जो सड़क निकाली गई है, उसका नामकरण उनके शहीद पति के नाम पर नहीं हुआ है। जिसका सरकार ने वायदा किया था। बद्दाघाट के शहीद हवलदार उधम सिंह के बेटे को सरकारी नौकरी भी दी गई है।
सरकार की ओर से इनके परिवार को जरूरी सभी सुविधाएं दी गई हैं। मोरसिंघी के शहीद राजकुमार के नाम पर सरकार ने एक नस्वाल में पेट्रोल पंप दिया है। पट्टा नसवाल के राइफलमैन शहीद विजयपाल के बेटे को सरकारी नौकरी और इनके परिवार के नाम पर एक गैस एजेंसी दी गई है। इस परिवार को भी वो सारा सम्मान दिया गया है जो एक शहीद के परिवार को मिलना चाहिए।
झंडूता के सेना मेडल नायक शहीद अश्वनी कुमार के नाम पर एक पेट्रोल पंप दिया गया है। वहीं सरकार ने झंडूता स्कूल का नाम भी शहीद अश्वनी कुमार के नाम पर रखा है। उन्हें भी मरणोपरांत पूरा मान-सम्मान सरकार द्वारा दिया गया। वहीं, झंडूता से एसडीएम मुख्यालय आनंदघाट तक सड़क का नाम भी शहीद अश्वनी स्मारक रखा गया है।
सुन्हानी के कारगिल शहीद मस्त राम का बेटा सरकारी नौकरी में है। शहीद के बेटे मदन लाल ने बताया कि इनके परिवार को सरकार ने जो भी वायदा किया था उसे पूरा कर दिया गया है। कारगिल शहीदों के परिवारों को पूरी सुविधाएं मुहैया करवाना और उनके परिवारों को नौकरी दिलवाने के लिए सैनिक बोर्ड पूरा सहयोग करता है।
अगर किसी शहीद के परिवार को किसी प्रकार की कोई समस्या हो तो बोर्ड उसके निवारण के लिए काम करता है। बिलासपुर के सभी कारगिल शहीदों के परिवारों को पूरी सुविधाएं दी गई हैं। अगर किसी परिवार को कोई समस्या हो तो वो सैनिक बोर्ड को इससे अवगत करवाए। लेफ्टिनेंट कर्नल पीएस अत्री, उप निदेशक जिला सैनिक कल्याण कार्यालय बिलासपुर