सरकार और महेश्वर सिंह के बीच तल्खी बढ़ती जा रही है। हाल ही में रघुनाथ मंदिर अधिग्रहण के बाद सीएम वीरभद्र सिंह की ओर से आए बयानों के बाद सोमवार को आयुर्वेद मंत्री और महेश्वर सिंह के भाई कर्ण सिंह ने भी मोर्चा संभाल लिया।
दशहरा मेला की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि मंदिर किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे परिवार का है। कहा कि सरकार ने सिर्फ मंदिर प्रबंधन का अधिग्रहण किया है। सैकड़ों साल से चली आ रही परंपराओं को न तो बदला गया है और न ही उन्हें बदला जाएगा।
साफ किया कि पूजा में अब भी सारे अधिकार छड़ीबरदार महेश्वर सिंह के ही रहेंगे। मंदिर की सुरक्षा, रखरखाव और अन्य तरह के प्रबंधन सरकार देखेगी। पालकी से छड़ीबरदार के आने की प्रथा को बंद करने के सवाल पर उन्होंने साफ किया कि मंदिर से जुड़ी किसी भी परंपरा को नहीं बदला जाएगा। पालकी में बैठकर आना न आना छड़ीबरदार के ऊपर निर्भर करेगा।
अपमानित होने तो नहीं जाऊंगा बैठक में : महेश्वर
सदर विधायक एवं रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह
- फोटो : अमर उजाला
कर्ण सिंह ने महेश्वर पर निशाना साधते हुए कहा कि वह हवा के रुख के साथ नहीं बदलते। भाजपा से कांग्रेस में आने के बाद भी वह वीरभद्र सिंह का उतना ही सम्मान करते हैं, जितना पहले करते थे।
महेश्वर का नाम लिए बिना कहा कि हम शादी ब्याह में खुशी में जरूर नाचते हैं, लेकिन सीएम के जन्मदिन पर बकरा लेकर माल रोड पर नहीं नाचते। कुछ लोग ऐसे होते हैं, जिन्होंने भाजपा छोड़ी तो धूमल को भी नहीं बख्शा और जब वापस पहुंचे तो अब सीएम पर निशाना साध रहे हैं।
अपमानित होने तो नहीं जाऊंगा बैठक में : महेश्वर
बैठक में न जाने को लेकर कुल्लू विधायक एवं भगवान रघुनाथ के छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। कहा कि ऐसी जगह खुद को अपमानित कराने के लिए नहीं जाऊंगा।
कहा कि एक मामला कोर्ट में लंबित है, उसके बाद भी लोग बयानबाजी कर रहे हैं। ऐसे में उन लोगों के साथ बैठक में बैठकर अपना अपमान नहीं कराऊंगा। जो लोग रघुनाथ मंदिर को गैराज बताते हुए भव्य मंदिर की स्थापना की बात कहते हैं, उन्हें वक्त खुद ही सही जवाब देगा।