शिमला में न्यायाधीशों का सम्मेलन।
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हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के होटल पीटर हॉफ में शनिवार को न्यायाधीशों के सम्मेलन में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश अनिरुद्ध बोस ने कहा कि न्यायिक प्रणाली में प्रौद्योगिकी का उपयोग पारदर्शिता और दक्षता लाएगा। दो दिवसीय इस राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने किया। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान ने अपने स्वागत भाषण में मुख्यमंत्री का सम्मेलन में भाग लेने के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका राज्य का एक महत्वपूर्ण स्तंभ होने के नाते संविधान को आकार देने और इसकी व्याख्या करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह सम्मेलन न्यायालयों में कृत्रिम मेधा (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस), क्रिप्टो-मुद्रा, सूचना और संचार सहित अन्य प्रौद्योगिकी के विकास पर केंद्रित है। राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी भोपाल के समन्वय से प्रदेश हाईकोर्ट इस सम्मेलन का आयोजन कर रहा है, जिसमें लगभग 160 न्यायाधीश भाग ले रहे हैं।
राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी भोपाल के निदेशक न्यायाधीश एपी साही, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस, हिमाचल न्यायिक अकादमी के अध्यक्ष विवेक सिंह ठाकुर मौजूद थे। इसके अलावा सम्मेलन में आमंत्रित उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों और दिल्ली, पंजाब और हरियाणा, उत्तर प्रदेश, जम्मू और कश्मीर और लद्दाख, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के उच्च न्यायालयों के न्यायिक अधिकारी भाग ले रहे हैं। अपने भाषण में न्यायाधीश बोस ने कहा कि त्वरित न्याय पाना नागरिक का अधिकार है, जिसे प्रौद्योगिकी के माध्यम से पारदर्शिता और दक्षतापूर्ण तरीके से पूरा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हिमाचल हाईकोर्ट की ओर से शिमला में करवाए जा रहे राष्ट्रीय स्तर के इस सम्मेलन में भाग लेने पर वे गौरवान्वित महसूस कर रहे है।
उन्होंने कहा कि सांविधानिक कानून में समकालीन रुझान, उच्च न्यायालय के निर्णयों के पूर्ववर्ती मूल्य, आपराधिक कानून में विकास, ई-न्यायालय परियोजना का अवलोकन और प्रभावी न्यायिक प्रशासन के लिए उभरती और भविष्य की तकनीक पक्षकारों को त्वरित न्याय दिलाने का काम करेगी। न्यायाधीश संजय करोल ने भी हिमाचल हाईकोर्ट की इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि नाथू राम गोडसे के ट्रायल का गवाह रह चुका शिमला का पीटरहॉफ अब इस राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन का गवाह भी बन गया है। उन्होंने कहा कि वैकल्पिक विवाद निवारण विभिन्न विवादों को सुलझाने का एक साधन है।
इस न्याय व्यवस्था से जुड़े सभी लोगों के लिए तकनीक के अनुरूप कानूनी शिक्षा तैयार करना एक महत्वपूर्ण लक्ष्य होना चाहिए। राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी भोपाल के निदेशक न्यायमूर्ति एपी साही ने इस राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन के लिए हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट और हिमाचल न्यायिक अकादमी का आभार जताया। उन्होंने कहा कि न्यायिक प्रणाली में परिवर्तन एवं सुदृढ़ीकरण के लिए प्रौद्योगिकी को एक सहायक के रूप में रेखांकित करने की आवश्यकता है। प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।