राजधानी शिमला में नए वाहनों का रजिस्ट्रेशन अब तभी होगा जब कलेक्टर शिमला की ओर से वाहन मालिक को पार्किंग होने का प्रमाण पत्र दिया जाएगा। मौके पर निरीक्षण करने की जिम्मेदारी एसएचओ की होगी।
शुक्रवार को हिमाचल हाईकोर्ट ने अमर उजाला में 12 दिसंबर 2014 के अंक में ‘फायर ब्रिगेड को शेरे-ए-पंजाब तक पहुंचने में लगा सवा घंटा’ शीर्षक से छपी खबर पर संज्ञान लेते हुए यह आदेश पारित किया।
नगर निगम शिमला को भी छह सप्ताह के भीतर सभी अवैध कब्जे हटाने के निर्देश दिए गए हैं। इस आदेश का अनुपालन न होने की स्थिति में सीधे तौर पर अधिकारियों के खिलाफ अवमानना का मामला दर्ज किया जाएगा।
ये आदेश भी पढ़ लें जरा ध्यान से
हाईकोर्ट ने अपने आदशों में कहा कि पूरे शिमला में किसी भी दुकानदार को गली के किनारों और ड्रेन पर सामान प्रदर्शित करने की अनुमति नहीं होगी। कोई भी दुकान के आगे तिरपाल नहीं लगा सकेगा। नगर निगम शिमला की परिधि में किसी भी हॉकर को दुकान के आगे सामान बेचने की अनुमति नहीं होगी।
नगर निगम शिमला नगर निगम अधिनियम की धारा 227 में दिए प्रावधानों का पालन करे, जिसमें डिफाल्टरों के लाइसेंस निरस्त करने का भी प्रावधान है। अतिक्रमणकारियों के खिलाफ भारतीय दंड सहिंता की धारा 283 व 133, पुलिस अधिनियम की धारा 114 और हिमाचल प्रदेश नगर निगम अधिनियम की धारा 396 के तहत कार्रवाई की जाए। चयनित डिफाल्टरों को सुधरने का सिर्फ एक मौका दिया जाए।
6 सप्ताह के भीतर सभी अवैध कब्जे हटाएं
उसके बाद उनके लाइसेंस निरस्त कर दिए जाएं। नगर निगम शिमला 6 सप्ताह के भीतर सभी अवैध कब्जों को हटाये। उसके बाद पूरे क्षेत्र का जीपीएस से डिमार्केशन किया जाए। त्योहारों के दौरान नीलम शर्मा मामले में 29 सितंरबर 2009 को पारित आदेश लागू होंगे। स्पेशल मैजिस्ट्रेट नगर निगम शिमला के अधिकारी हफ्ते में एक बार लोअर बाजार और राम बाजार का निरीक्षण करेंगे।
हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेशों के अनुसार जब तक नगर निगम शिमला अपने बायलॉज संशोधित नहीं कर लेते तब तक कोई भी अवैध निर्माण नियमित नहीं किया जाए। नगर निगम को अधिकार होगा कि वह अवैध निर्माणों के बिजली और पानी के कनेक्शन काटने के आदेश दे। इसे अमल में लाने की जिम्मेदारी बिजली बोर्ड और पेयजल विभाग की होगी। चीफ फायर ऑफिसर हर महीने लोअर बाजार मॉक ड्रिल करे। सभी आपातकालीन वाहन बिना रोक टोक जा सकें।
अवैध निर्माणों की सुनवाई सिविल कोर्ट शिमला में नहीं होगी
अदालत ने स्पष्ट किया है कि कोई भी वाहन जो गंभीर रोगी को ले जा रहा हो वह आपातकालीन वाहनों की परिभाषा में आएगा। इन अवैध निर्माणों संबंधी सिविल कोर्ट शिमला किसी भी केस की सुनवाई नहीं करेगा। सिर्फ हाईकोर्ट इन मामलों पर सुनवाई करेगा। नगर निगम शिमला की परिधि में अवैध निर्माण न किये जाने को सुनिश्चित किये जाने के आदेश दिए हैं।
कमिश्नर नगर निगम शिमला और एसपी शिमला को आदेश दिए हैं कि वे इन आदेशों के अनुपालना बारे साप्ताहिक स्टेटस रिपोर्ट हाईकोर्ट की रजिस्ट्री में दायर किया करें। अदालत की ओर से दिए गए आदेशों की अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए कलेक्टर, कमिश्नर नगर निगम शिमला और एसपी शिमला को जिम्मेदारी तय की है।