दो विषयों पर सीएम से उठाएंगे: नड्डा
नड्डा ने बताया कि वह दो विषयों के बारे में मुख्यमंत्री से बात भी करेंगे और पत्र भी लिखेंगे। एक विषय जितने भी एनएचएआई के काम चल रहे हैं, उनको उद्योग से बाहर किया जाए क्योंकि उन्हें राज्य प्रदूषण बोर्ड की एनओसी हर साल लेनी पड़ती है, जिसके कारण काम धीमी गति से चल रहा है। इसके अंतर्गत स्टोन क्रेशर, तारकोल पिघलाने वाले यंत्र हॉट मिक्सर आते हैं। यह सब अस्थायी काम है और कुछ समय बाद बंद हो जाते हैं। दूसरा विषय ड्रेजिंग का है। ब्यास नदी के इर्द-गिर्द इसे लेकर काफी चिंता करने की आवश्यकता है और प्रदेश सरकार को इसके बारे जल्द से जल्द निर्णय लेना चाहिए।
केंद्र से आए पैसे को खर्च नहीं कर पा रही प्रदेश सरकार: नड्डा
नड्डा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में एक वातावरण बनाने का प्रयास किया जा रहा है कि केंद्र सरकार हिमाचल कि बारे में ध्यान नहीं दे रही है लेकिन गलती तो राज्य सरकार की है जो केंद्र से आए पैसे को खर्च नहीं कर पा रही है।
2021 से 2025 तक स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से ही आयुष्मान भारत स्वास्थ्य ढांचा मिशन के तहत 360 करोड़ 11 लाख रुपये प्रदान किए गए हैं, जिसमें से प्रदेश सरकार केवल 78 करोड़ ही खर्च कर पाई है। इस योजना के तहत प्रदेश में 73 ब्लाॅक लेबल पब्लिक हेल्थ यूनिट बनाए जाने प्रस्तावित हैं, जिनमें से छह ही बन पाए हैं जबकि 14 के टेंडर हुए हैं। आठ क्रिटिकल केयर यूनिट स्थापित होने हैं, जिसमें रोहडू, रिकांगपिओ, घवांडल, टांडा, मंडी अस्पताल व पांवटा साहिब शामिल हैं। प्रदेश को 15वें वित्तायोग से 521 करोड़ रुपये दिए गए हैं, जिसमें से केवल 128 करोड़ 62 लाख रुपये ही खर्च हुए हैं। उन्होंने कहा कि 25 मई को मुख्यमंत्री उनसे मिलने गए थे। उन्होंने जायका प्रोजेक्ट से पैसा दिलवाने का आग्रह किया था जिस पर 30 जून को 1138 करोड़ रुपये केंद्र ने मंजूर किए। इसमें से प्रदेश सरकार को 1024 करोड़ रुपये ग्रांट इन एड दिए गए हैं जबकि शेष राशि सस्ते लोन पर उपलब्ध करवाई गई है। नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रदेश को प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए तीन साल में एसडीआरएफ के तहत 1736 करोड़, एनडीआरएफ के तहत 1071 करोड़ और एसडीआरएफ के तहत 339 करोड़ रुपये प्रदान किए हैं। हाल ही में गृह मंत्री ने पीडीआरआरएफ के तहत 2006 करोड़ रुपये दिए हैं।