उन्होंने कहा कि पड़ोसी राज्यों में बढ़ते दबाव के कारण हिमाचल प्रदेश में मादक पदार्थों की तस्करी से संबंधित गिरफ्तारियां में कई गुणा इज़ाफा हुआ है। उन्होंने कहा कि चरस या भांग का हिमाचल में नशे के आदी व्यक्तियों की ओर से अधिक रूप से इस्तेमाल किया जाता है, परंतु अब सिनथेटिक नशा प्रमुख रूप से चिंता का कारण बन कर उभरा है।
उन्होंने कहा कि नशीले पदार्थों की लत न केवल एक व्यक्ति के लिए बल्कि उसके करीबी लोगों तथा विशेषकर सारे समाज के लिए घातक है। उन्होंने कहा कि मादक पदार्थों का दुरुपयोग तथा तस्करी अपराध, बीमारियों, दुघर्टनाओं, घरेलू हिंसा, बेरोजगारी जैसी समस्याओं को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को मादक पदार्थों से बचाने के लिए एक दीर्घकालीन रणनीति बनाई जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि अभिभावकों को अपने छोटे बच्चों के असामान्य व्यवहार पर भी नजर रखनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि नशे की प्रवृति के कारण बड़े पैमाने पर अपराध घटित हो रहे हैं क्योंकि नशे के आदी को अपनी जरूरत पूरा करने के लिए पैसा चाहिए होता है तथा जब उन्हें पैसा नहीं मिलता ऐसी अवस्था में हिंसा पर उतारू हो जाते हैं।