जेओए आईटी भर्ती पेपर लीक मामला।
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जेओए आईटी भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र बेचने के मामले में विजिलेंस ने सोमवार को चौथे दिन भी सभी आरोपियों से अलग-अलग पूछताछ की। आयोग की गोपनीय शाखा में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग को भी कब्जे में लिया है। इस रिकॉर्डिंग से पता चलेगा कि वरिष्ठ सहायक उमा आजाद बंद कमरे में किस तरह पेपर लीक के गोरखधंधे को अंजाम देती थीं। फिलहाल मुख्य आरोपी उमा आजाद, उसका बेटा निखिल आजाद, नौकरी नीरज कुमार, दलाल संजीव कुमार, अभ्यर्थी तनु शर्मा और अजय शर्मा सभी छह आरोपी न्यायालय से 28 दिसंबर तक पुलिस रिमांड पर चल रहे हैं।
23 दिसंबर को राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो हमीरपुर की टीम ने इन छह आरोपियों को पोस्ट कोड 965 के तहत जेआए आईटी भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र की खरीद-फरोख्त करते पकड़ा था। 25 दिसंबर को प्रस्तावित इस परीक्षा के लिए चयन आयोग ने 467 परीक्षा केंद्र बनाए थे और प्रदेश के एक लाख तीन हजार अभ्यर्थियों को एडमिट कार्ड जारी किए थे, लेकिन परीक्षा से दो दिन पूर्व ही प्रश्नपत्र लीक हो गया। इसके चलते यह भर्ती रद्द करनी पड़ी। विजिलेंस ने इस मामले में जिन छह छह लोगों को आरोपी बनाया है, उनसे लगातार पूछताछ जारी है। उधर, विजिलेंस ब्यूरो की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रेणू शर्मा ने कहा कि सभी छह आरोपियों से लगातार पूछताछ जारी है। आयोग की सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगाला जा रहा है।
आयोग में सेवारत अन्य कर्मचारियों का सेवा रिकॉर्ड भी खंगालेगी एसआईटी
हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर में सेवारत सभी कर्मचारियों का सेवा रिकॉर्ड को भी एसआईटी खंगालेगी। यहां सेवारत कर्मचारियों के परिवार के सदस्य और अन्य रिश्तेदार जो सरकारी नौकरी में लगे हैं, वह भी संदेह के दायरे में हैं। कर्मचारियों के परिवार के सदस्य और रिश्तेदार कब-कब सरकारी नौकरी में लगे हैं और भर्ती का माध्यम क्या रहा है, इस सारे मामले की जांच भी होगी।
पहले शिकायतकर्ता आया था उपायुक्त के पास
मामले का पटाक्षेप करने वाला शिकायतकर्ता का किस्सा भी रोचक है। शिकायतकर्ता ने जेओए आईटी के पद के लिए आवेदन किया था। जब दलाल ने उससे प्रश्नपत्र के बदले पैसों का ऑफर दिया तो अभ्यर्थी ने प्रण किया कि वह इस गलत रास्ते को नहीं अपनाएगा। अभ्यर्थी मामले की शिकायत लेकर उपायुक्त के पास पहुंचा। उपायुक्त लंबी छुट्टी पर थीं। इसके बाद वह एडीसी के पास पहुंचा, लेकिन एडीसी हमीरपुर भी कार्यालय से बाहर थे। मायूस होकर अपनी पहचान के एक व्यक्ति के पास पहुंचा। उसने विश्वास दिलाया कि विजिलेंस इस मामले में सख्त कार्रवाई कर सकती है। इसके बाद अभ्यर्थी विजिलेंस कार्यालय हमीरपुर में पहुंचा। शिकायत मिलने के बाद अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विजिलेंस रेणू शर्मा ने जांच टीम का गठन किया और इस मामले का पर्दाफाश कर आरोपियों को सलाखों के पीछे धकेलने में सफलता मिली।