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पीलिया ने अफसर-डॉक्टर भी लिटाए

Mon, 18 Jan 2016 11:11 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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पीलिया की चपेट में आईएएस अफसर और डाक्टर भी आने लगे हैं। खाद्य एवं आपूर्ति एवं परिवहन विभाग के निदेशक आईएएस अफसर प्रियतु मंडल और आईजीएमसी के दो वरिष्ठ चिकित्सक भी इस रोग की चपेट में आ गए हैं। प्रियतु मंडल का आईजीएमसी में इलाज चल रहा है।
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रविवार को अस्पताल के आईसीयू में पीलिया के दो गंभीर मरीज दाखिल थे। इनमें एक बच्चा और एक व्यस्क हैं। इसके अलावा पीलिया से पीड़ित सात मरीजों का उपचार मेडिसन विभाग के वार्ड में चल रहा है। अब लगभग पूरे शहर को पीलिया ने अपनी चपेट में ले लिया है।

रोजाना अस्पतालों में 55 से 60 पीलिया रोगी उपचार के लिए आ रहे हैं। दूसरी ओर डिस्पेंसरी और पीएचसी सेंटर में भी लोगों की भारी भीड़ लग रही है। शहर की जनता में भय का माहौल बना हुआ है।
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वार्ड में ये भी है भर्ती- आईजीएमसी की यूनिट वन और फोर में वायरल हैपेटाइटिस से पीड़ित रामदेव, सीताराम, गौरव और पीलिया रोग से जीवानंद पीड़ित हैं। जीवानंद की उम्र 27 साल है। यह युवक पंद्रह जनवरी को एडमिट किया गया है। यूनिट सेकंड और थर्ड में मोतीराम पीलिया रोग होने के कारण भर्ती हैं। परिजनों का कहना है कि उनकी हालत में सुधार है और कुछ दिनों में उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल जाएगी।

उधर, आईजीएमसी अस्पताल के चिकित्सा अधिकारी प्रशासनिक डा. शाद रिजवी ने कहा कि आईएएस अफसर प्रियतु मंडल भी पीलिया से पीड़ित हैं। इनका उपचार चल रहा है। अस्पताल के दो वरिष्ठ चिकित्सक भी पीलिया की चपेट में आए हैं। यहां दाखिल मरीजों की बेहतर देखभाल की जा रही है। लोगों को जागरूक किया जा रहा है।

डॉक्टर भी पहुंचे पीलिया झड़वाने- पीलिया के प्रकोप से बचने के लिए अब डाक्टर भी झाड़ फूंक का सहारा ले रहे हैं। बैम्लोई में पीलिया झड़वाने के लिए एक शहर के नामी डाक्टर भी पहुंचे थे। यह डाक्टर बीते 15 दिनों से पीलिया से पीड़ित हैं। इन्हें देखकर वहां मौजूद दूसरे पीड़ित भी हैरत में रह गए।

क्योंकि डाक्टर आम तौर पर पीलिया पीड़ितों को आराम की सलाह देते हैं और झाड़ फूंक से दूर रहने की सलाह देते हैं। उधर, बैम्लोई में पीलिया झड़वाने आए आए कसुमप्टी निवासी विकास ने बताया कि पीलिया रोग के लक्षण पता चलने पर सचिवालय की डिस्पेंसरी में दिखाया था। लेकिन दवाओं से कोई लाभ नही पहुंचा है व मजबूरी में यहां आना पड़ा।

दवा से नहीं मिला आराम, तभी यहां आया- पीलिया की झाड़फूंक के लिए बारी का इंतजार कर रहे विक्रम ने बताया कि निजी अस्पताल में लक्षण का पता चलने पर टेस्ट करवाए थे। लेकिन दवाइयों से आराम नहीं हुआ, इसलिए अब यहां आया हूं।

अश्वनी खड्ड की सप्लाई बंद होने के बाद भी पूरा शहर पीलिया की जकड़ में आ चुका है। लोग पीलिया रोग से बचने के लिए अस्पतालों में जाकर टेस्ट तो करवा रहे हैं, लेकिन झाड़फूंक को बेहतर मान रहे हैं। पीड़ितों ने बताया कि झाड़फूंक ही आसान तरीका है।

अश्वनी खड्ड से आने वाले पानी को पीया- खलीणी में रहने वाली संगीता ने बताया कि अश्वनी खड्ड से दी जाने वाली सप्लाई के गंदे पानी को पीया है। गंदे पानी के कारण वह और उनका बेटा इस रोग की चपेट में आ गए हैं।

घरवालों के भेजने पर यहां आई हूं- टुटू में रहने वाली उर्मिल ने बताया कि उन्हें लिवर इन्फेक्शन था। बाकायदा आईजीएमसी अस्पताल में टेस्ट भी करवाए गए थे। लेकिन अब घरवालों ने कहा कि बैम्लोई में पीलिया झड़वाना चाहिए। इससे पहले वह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भी एडमिट हो चुकी है।

इन क्षेत्रों से आ रहे सबसे ज्यादा रोगी- मल्याणा, मैहली, पंथाघाटी, विकासनगर, न्यू शिमला, खलीणी, लालपानी, फागली, चक्कर, समरहिल, फिंगास्क, लक्कड़ बाजार, संजौली, छोटा शिमला, केएनएच और कैथू के अलावा आसपास के क्षेत्रों से पीलिया रोगियों के आने का सिलसिला जारी है।

बावड़ी का पानी न पीएं लोग- नगर निगम आयुक्त पंकज राय ने शहर के लोगों से बावड़ी का पानी इस्तेमाल न करने की अपील की है। पंकज राय ने कहा है कि शहर में कुछ जगहों पर लोग नल के पानी की जगह बावड़ी का पानी इस्तेमाल कर रहे हैं।

नगर निगम ने अश्वनी खड्ड से पानी की सप्लाई लेना बंद कर दिया है। उन्होंने कहा कि पूरे शहर में जांच के बाद गिरि और गुम्मा परियोजना का पानी ही लोगों को उपलब्ध करवाया जा रहा है। ऐसे में लोग नगर निगम की ओर से दिए जा रहे पानी का ही प्रयोग करें।
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