दशकों से प्रस्तावित जलोड़ी जोत टनल निर्माण को लेकर केंद्र सरकार ने प्रक्रिया तेज कर दी है। 11 फरवरी को 4.2 किलोमीटर लंबी टनल की फाइनल डीपीआर और 97 किलोमीटर लंबे हाईवे-305 की भूमि अधिग्रहण और फोरेस्ट क्लीयरेंस के लिए टेंडर होंगे। टनल की डीपीआर पर 6.05 करोड़ खर्च होंगे और दस महीने के भीतर डीपीआर तैयार होगी।
हाईवे-305 के निर्माण में आने वाली जमीन के भूमि अधिग्रहण और वन विभाग की मंजूरी का काम छह महीने में पूरा होगा। इस पर 1.75 करोड़ खर्च होंगे। उम्मीद की जा रही है कि 2021 में जलोड़ी टनल और हाईवे का निर्माण शुरू होगा।
दिसंबर माह में केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने जलोड़ी दर्रा टनल का जियोलॉजिकल सर्वेक्षण एमआई-17 हेलीकाप्टर से किया था। इसकी रिपोर्ट अगले कुछ महीनों में डेनमार्क से आएगी जिसमें जलोड़ी दर्रा के भीतर पत्थर और पानी का पता चल सकेगा।
एनएच अथॉरिटी के अधीशासी अभियंता पीसी नेगी ने कहा कि 11 फरवरी को जलोड़ी टनल, हाईवे-305 के भूमि अधिग्रहण और फोरेस्ट क्लीयरेंस की डीपीआर के लिए टेंडर होंगे। दोनों टेंडर पर 7.80 करोड़ खर्च होंगे। टनल की डीपीआर दस माह और हाईवे की भूमि अधिग्रहण और फोरेस्ट क्लीयरेंस की डीपीआर छह माह में तैयार करनी होगी।
बाह्य सराज की 58 पंचायतों को होगा फायदा
फरवरी 2014 में जलोड़ी टनल और हाईवे-305 का सर्वे मुंबई की ध्रुव नामक कंपनी ने किया है। टनल निर्माण से बाह्य सराज की 58 पंचायतों के लोग 12 माह जिला मुख्यालय कुल्लू से जुडे़ रहेंगे। वहीं, प्रदेश के कई जिलों के हजारों लोगों व पर्यटकों को भी इसका लाभ मिलेगा।