छह से आठ घंटे ड्यूटी के बजाए प्रदेशभर में 8 से 10 घंटे ड्यूटी देने के लिए मल्टीपर्पस वर्कर मजबूर हैं। इसके बावजूद इन कर्मचारियों को नाममात्र वेतनमान 4,400 रुपये ही मिल रहा है। इससे इन कर्मचारियों को अपने परिवारों का भरण पोषण करने में परेशानियां उठानी पड़ रही हैं। मल्टीपर्पस वर्करों ने अन्य विभागों में अनुबंध कर्मचारियों की तरह ही मासिक वेतनमान देने और नियमित करने की मांग उठाई है।
मल्टीपर्पस वर्करों दीपक कुमार, अमन चंद्रा, मयंक, पप्पू राम, कुुशल, राहुल कुमार, गगन कुमार, बिटटू, ऋतिक, पंकज कुमार, अक्षय ने बताया कि प्रदेशभर में जलशक्ति विभाग की ओर से पैरा नीति के तहत साल 2020-21 में अमूमन पांच हजार मल्टीपर्पस वर्कर नियुक्त किए। बताया कि पैरा नीति के तहत मल्टीपर्पस की तैनाती छह घंटे के लिए हुई थी। जबकि, मल्टीपर्पज वर्करों को आठ से दस घंटे सेवा देनी पड़ रही है।
इसकी एवज में 3,900 रुपये प्रति माह वेतन दिया जाता था। बताया कि मार्च 2023 के बजट सत्र में 500 रुपये की बढ़ोतरी के साथ अब वेतन 4,400 हो गया है। उन्होंने मल्टीपर्पज वर्करों के मानदेय में वृद्धि करने पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू समेत समस्त मंत्रियों का आभार व्यक्त किया है। बताया कि महंगाई के इस दौर में इतने वेतनमान से उन्हें परिवारों के भरण पोषण की चिंता सताती रहती है।
विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया के माध्यम से उन्होंने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेज कर प्रदेेश के जलशक्ति विभाग में रखे गए मल्टीपर्पस वर्करों की तैनाती आठ घंटे करने और अन्य विभागों की तर्ज पर उन्हें अनुबंध पर लाकर नियमित करने की मांग उठाई है।