प्रदेश जल शक्ति विभाग पिछले वित्तीय वर्ष में करोड़ों रुपये खर्च नहीं कर पाया। विभाग के अफसरों की कारगुजारी मंत्रिमंडल उप समिति के समक्ष बुधवार को दी प्रस्तुति में उजागर हुई है। उप समिति ने विभाग की इस कमजोरी पर चिंता भी जताई है। विभाग करोड़ों की यह राशि क्यों खर्च नहीं कर पाए। इसे लेकर सरकार जवाबतलबी करेगी।
राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव राम सुभग सिंह मंत्रिमंडल उप समिति के समक्ष सुबह 10 बजे से लेकर दोपहर बाद 2.50 बजे तक लंबी प्रस्तुति दी। इसमें उन विभागों का जिक्र किया गया, जो वर्ष 2001 से 2020 तक विकास कार्यों के लिए रखी धनराशि व्यय नहीं कर पाए।
ऐसे विभागों में हिमाचल प्रदेश का जल शक्ति विभाग भी चर्चा में रहा है। कमेटी ने फैसला लिया है कि विभाग मदों के लिए रखी धनराशि व्यय क्यों नहीं कर पाया। इसे लेकर किसी एक मंत्री को दायित्व सौंपा जाए, जो प्रदेश, जिला और ब्लाक स्तर पर तैनात अधिकारियों की बैठक लें और उनके पूछा जाए कि धनराशि खर्च करने में क्यों लापरवाही की गई।
इस धनराशि को कब और कैसे कब तक खर्च किया जाएगा। इस संबंध में जल शक्ति विभाग के अधिकारियों के माध्यम से प्रस्ताव भेजने को कहा जाएगा ताकि यह राशि विकास कार्यों में व्यय की जा सके।
राज्य के जल शक्ति विभाग के सचिव आरएन बत्ता कहते हैं कि विभाग जनवरी 2020 के बाद 60 करोड़ की धनराशि व्यय नहीं हो पाई है। विभाग लॉकडाउन के कारण यह धनराशि व्यय नहीं कर पाया है।