मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर (फाइल फोटो)
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85 हजार करोड़ के निवेश का भारी-भरकम लक्ष्य पार कर गदगद होने वाली जयराम सरकार ग्लोबल इन्वेस्टर मीट खत्म होने के बाद अब प्रदेश के भविष्य की रणनीतियों को सही दिशा देने में जुट गई है। अभी तक उत्पादन क्षेत्र पर जोर देने वाली सरकार अब इन्वेस्टर मीट के दौरान हिमाचल के लिहाज से निर्धारित किए गए निवेश क्षमता वाले सेक्टरों में निवेश पर जोर देगी।
मीट के दौरान हुए समझौतों को जमीन पर उतारने की कवायद के साथ सरकार इस ओर कदम बढ़ाने जा रही है। जल्द मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर एक बैठक कर भविष्य की सोच पर जोर देने के लिए अफसरों के साथ मंथन करेंगे।
इन्वेस्टर मीट के दौरान निवेशकों को रिझाने के लिए सरकार ने मंथन कर हिमाचल में निवेश के लिहाज से क्षमता वाले कई क्षेत्रों का चयन किया। इनमें उद्योग, पर्यटन, आयुष, आईटी, ऊर्जा और फिल्म क्षेत्र शामिल हैं। इन क्षेत्रों में निवेश के लिए निवेशकों को कई नीतियां बनाकर पेश की गईं।
चूंकि, उद्योग क्षेत्र में सबसे बड़ी समस्या हिमाचल में कच्चे माल की उपलब्धता है। बाहर से कच्चा माल हिमाचल लाना भी महंगा साबित होता है। ऐसे में इन्वेस्टर मीट के दौरान हुए निवेश समझौतों पर ही सरकार फोकस करेगी। इसके बाद भविष्य में उत्पादन के बजाय आयुष, पर्यटन, आईटी और ऊर्जा जैसे अन्य क्षेत्रों पर जोर दिया जाएगा। निवेशकों के लिए कई तरह की निवेश नीतियां बना दी गई हैं।
छह नीतियों को सरकार ने दी थी मंजूरी
इन क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देने और निवेशकों को आकर्षित करने के लिए छह नीतियां जयराम सरकार ने बनाईं। इनमें औद्योगिक निवेश नीति, पर्यटन नीति, आयुष नीति, आईटी आईटीईएस व ईएसडीएम नीति व फिल्म नीति शामिल है। पुरानी ऊर्जा नीति में संशोधन कर उसमें भी कई बदलाव किए गए हैं।