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HP Politics: जयराम ठाकुर बोले- आपदा में जश्न मनाना ही रही राज्य सरकार की उपलब्धि

Thu, 05 Mar 2026 06:17 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

 जयराम ठाकुर ने प्रदेश सरकार की ओर से छह महीने बाद आपदा प्रबंधन अधिनियम हटाए जाने के निर्णय पर सवाल खड़े करते हुए कांग्रेस सरकार पर जुबानी हमला बोला। 
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नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व सीएम जयराम ठाकुर - फोटो : संवाद
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विस्तार
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पूर्व मुख्यमंत्री और नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने प्रदेश सरकार की ओर से छह महीने बाद आपदा एक्ट (डिजास्टर एक्ट) हटाए जाने के निर्णय पर सवाल खड़े करते हुए कांग्रेस सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। जयराम ठाकुर ने कहा कि आपदा में जश्न मनाना ही सरकार की उपलब्धि रही है, जिस पर दस करोड़ रुपये खर्चे गए जबकि राहत कार्यों को अनदेखा किया गया। जहां सबसे ज्यादा नुकसान हुआ वहां के लोगों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम इस असंवेदनशील सरकार ने किया।

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जयराम ठाकुर ने कहा कि आपदा राहत के नाम पर अब तक कितनी राशि वास्तव में प्रभावितों पर खर्च की गई है और धरातल पर उसका क्या असर दिखा है। राज्य की वर्तमान स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि आज भी प्रदेश के कई हिस्सों में हालात जस के तस बने हुए हैं। सड़कों पर मलबा बिखरा पड़ा है और सैकड़ों बस रूट पिछले आठ महीनों से बंद पड़े हैं जिससे आम जनता को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली पर तंज कसते हुए कहा कि जो पुल आपदा में टूट गए थे, उन्हें आज भी केवल अस्थाई व्यवस्था के माध्यम से छोटे और हल्के वाहनों के योग्य ही बनाया जा सका है, जबकि भारी वाहनों और परिवहन के लिए स्थाई निर्माण की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। इसके दुष्परिणाम इस वर्ष फिर बरसात में देखने को मिलेंगे क्योंकि इस सरकार ने आपदा में सिर्फ बड़ी-बड़ी मशीनों के बिल पास करने और मित्रों के घर भरने का काम किया है जबकि धरातल पर हालत जस के तस हैं।

कई प्रभावित क्षेत्रों में बिजली के खंभे और ट्रांसफार्मर तक अभी तक नहीं लगाए गए हैं। ऐसे में सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि आपदा एक्ट लगाया ही क्यों गया था और यदि लगाया गया था, तो इस लंबी अवधि में विकास और बहाली के काम क्यों नहीं किए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने आपदा एक्ट की आड़ में केवल पंचायत चुनावों को टालने का काम किया और प्रदेश के तमाम विकास कार्यों को ठप करके रख दिया।
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उन्होंने दावा किया कि सरकार जानबूझकर चुनाव आगे खिसकाकर विकास की गति को रोकना चाहती है और केंद्र से मिलने वाली आर्थिक मदद को पंचायतों तक पहुंचने से रोक रखा है। यदि समय पर पंचायत चुनाव कराए जाते, तो कम से कम स्थानीय स्तर पर विकास कार्य सुचारू रूप से चलते, लेकिन सरकार खुद काम करने की स्थिति में नहीं दिख रही है और दूसरों को भी काम करने नहीं दे रही है।
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