वहीं, घोटाले में नाम आने से लेकर चार्जशीट होने के बीच जयराम सरकार ने ऊर्जा से लेकर वित्त जैसे महत्वपूर्ण महकमे उनके हवाले कर दिया। सूत्रों का कहना है कि कुछ समय पहले उन्हें हटाने की फाइल चली लेकिन सरकार के आला अधिकारियों के दबाव में ऐसा नहीं हुआ।
अब चार्जशीट होने के बाद सरकार पर एक बार फिर हटाने का दबाव है क्योंकि चार्जशीट स्वीकार होते ही वह आफिस आफ डाउटफुल इंटीग्रिटी (ओडीआई) सूची में शामिल हो जाएंगे। इसके बाद अगर सक्सेना को हटाया जाता है तो सरकार की खासी किरकिरी होनी तय है।
कांग्रेस सरकार का घोटाला
आईएनएक्स घोटाला केंद्र की कांग्रेस नीत मनमोहन सरकार के दौरान हुआ था। लेकिन प्रदेश भाजपा की जयराम सरकार ही कांग्रेस सरकार के दौरान भ्रष्टाचार के आरोपी अफसर को बचाने में जुटी हुई है।
खास बात यह है कि जिस चिदंबरम पर केंद्रीय एजेंसियां रहम खाने का सोच भी नहीं रही, उसी के साथी अफसरों पर प्रदेश सरकार कार्रवाई करने तक से कतरा रही है। जयराम सरकार के इसी रवैये के बाद अब सरकार की स्थिति पर ही सवाल खड़े होने लगे हैं।