27 दिसंबर को लैपटॉप का आवंटन होने की संभावना थी लेकिन अंतिम क्षणों में इसको मंजूरी नहीं मिल सकी है। ऐसे में बीते दो साल से लैपटॉप मिलने के इंतजार में बैठे 9700 मेधावियों को निराश होना पड़ा है। साल 2017-18 और 2018-19 के मेधावियों को लैपटॉप दिए जाने हैं।
रंग उतरने की शिकायतों से स्मार्ट स्कूल वर्दी पर लगा दाग
निजी स्कूलों का मुकाबला करने के लिए प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को पहली बार दी गई स्मार्ट वर्दी पर रंग उतरने के आरोप लगने से जयराम सरकार की इस योजना पर दाग भी लगा है। इसके अलावा कई जगह स्कूल बैग फटने का मामला भी सामने आया है।
जयराम सरकार ने सत्ता संभालते ही राजधानी शिमला में भयंकर पेयजल संकट झेला। इससे सीख लेते हुए सरकार दूसरे साल की गर्मियों में शिमला के जलसंकट पर काबू पाने में तो कामयाब रही। शहर के कुछ इलाकों में 24/7 की तर्ज पर पानी भी दिलाया जाने लगा, लेकिन प्रदेश के गांव-गांव में पर्याप्त पानी पहुंचाने की मुहिम को अंजाम देने के रास्ते में अभी कई मुसीबतें हैं। हिमाचल प्रदेश में कुल 54,208 बस्तियां चिन्हित हैं।
इसमें से 34,080 बस्तियों को पूरा पेयजल मिल रहा है। बाकी बस्तियों में पर्याप्त पेयजल आपूर्ति नहीं हो पा रही है। आईपीएच विभाग में कर्मचारियों की बहुत कमी है। बगैर प्रशिक्षित स्टाफ के ही सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग की योजनाएं चलाई जा रही हैं। खुद शीत सत्र के दौरान सरकार ने स्वीकार किया कि कर्मचारियों का डाइंग काडर बनाए जाने के कारण स्टाफ की कमी है। इससे लिफ्ट मशीनें या तो ठप पड़ी हैं या इन्हें अप्रशिक्षित स्टाफ चला रहे हैं।