आय से अधिक संपत्ति के मामले में हिमाचल के सीएम को इनकम टैक्स एपिलेट ट्रिब्यूनल (आईटीएटी) से राहत नहीं मिली है। बुधवार को आटीएटी में छह करोड़ के आय से अधिक संपत्ति के मामले में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की साल 2009 - 2010 में भरी गई रिवाइज्ड आईटी रिटर्न का मूल्यांकन करने की दायर अपील को खारिज कर दिया।
सीबीआई ने सितंबर 2015 में मुख्यमंत्री के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया था। जिन पर 6.08 करोड़ की वर्ष 2008 से 2012 के बीच की इनकम टैक्स रिटर्न को वैध किए जाने का आरोप है। आरोप के मुताबिक उन्होंने बीमा एजेंट आनंद चौहान के जरिए एलआईसी पालिसी में 6.59 करोड़ लगाए थे। बीमा एजेंट के साथ यह डील 15 जून 2008 को की गई थी।
ताकि शिमला के दमराली में अपने सेब के बाग तीन वर्ष के लिए मैनेज किए जा सके। आरोपों के मुताबिक बीमा एजेंट सीएफ के परिवार के नाम पर बीमे के कागज लेकर आए। ट्रिब्यूनल में दायर अपील में मुख्यमंत्री की तरफ से दावा किया गया कि एलआईसी पालिसी में जो पैसा उन्होंने लगाया है वह कृषि से संबंधित आय है, इसलिए रिवाइस आईटी रिटर्न के तहत उनकी अपील पर विचार किया जाए।