हिमाचल में अब इटली का सेब क्रांति लाएगा। इसके साथ ही नाशपाती की किस्में भी आएंगी। प्रदेश में इटली की सेब प्रजातियों की भारी मांग है। इसे देखते हुए इटली से फलदार पौधों की उन्नत किस्मों का प्लांटिंग मैटीरियल आयात किया जा रहा है।
उच्च गुणवत्ता का प्लांट मैटीरियल बागवानों को मिले यह सुनिश्चित करने के लिए दो सदस्यों का एक दल इटली हॉलैंड का दौरा कर वापस लौट आया है। यह दल 13 फरवरी से 23 फरवरी तक इटली हॉलैंड की सात नर्सरियों में विजिट कर चुका है।
पहले फेज में सेब और नाशपाती के 2.10 लाख पौधे आयात होंगे। दो सदस्यीय दल में नौणी यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ. विजय सिंह ठाकुर, निर्देशक और प्रगतिशील बागवान जितेंद्र सरकैक शामिल थे। मिशन फॉर इंटीग्रेटिड डेवलपमेंट हॉर्टिकल्चर (एनआईडीएच) की वर्ल्ड बैंक के प्रोजैक्ट के तहत नौणी यूनिवर्सिटी के संयुक्त निदेशक डॉ. सतीश शर्मा आजकल इटली में है।
वर्ष 2017 तक बागवानों को इटली के उन्नत किस्मों के सेब, नाशपाती के पौधे मिल सकेंगे। प्रदेश में दो अलग प्रोजेक्टों के तहत प्लांट मैटीरियल बना रहा है। बागवानी मंत्री विद्या स्टोक्स के आग्रह पर हिमाचल में पहली बार इटली का सेब क्रांति लाएगा, जिससे आने वाले समय में बागवान इटली से निर्यात सेब और नाशपाती का लाभ उठा सकेंगे।
डॉ. परमार यूनिवर्सिटी नौणी के निर्देशक जितेंद्र सरकैक ने बताया कि सेब का रूट स्टॉक एमएम 106 और नाशपाती की एबीसी रूट स्टॉक को इस बार लाया जा रहा है। नाशपाती की एबीसी प्रजाति पहली बार भारत में आएगी। जितेंद्र सरकैक ने बताया कि इटली हॉलैंड में कलमें करने का तरीका बहुत हाईटेक है। इटली से पहले फेज में इस बार सेब, नाशपाती की उन्नत किस्मों के करीब 2 लाख 10 हजार पौधे आयात होगा। यह पौधे दो अलग-अलग प्रोजेक्टों के तहत लाए जा रहे हैं।
यह है इटली से आने वाले सेब की खासियत
इटली से आने वाले सेब और नाशपाती के पौधे करीब 20 से 25 साल पुराने हैं। इटली का सेब देखने में बहुत आकर्षक होता है। इसके साथ ही इस सेब की गुणवत्ता बढ़िया है।