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इटली के सेब और नाशपाती बदलेंगे प्रदेश के बागवानों की तकदीर

Mon, 20 Nov 2017 01:19 PM IST
हरीश चंद्र/अमर उजाला, धर्मशाला
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हिमाचल के बागवान अब इटली के सेब और नाशपाती की किस्मों से अपनी तकदीर बदल सकेंगे। कम समय में तैयार होने वाले ये पौधे गुणवत्ता और उत्पादन के लिहाज से भी बेहतर विकल्प बताए जा रहे हैं। बागवानी विभाग ने इटली से दोनों फलों के पौधों की खेप मंगवाई है, जिसे कुल्लू के बजौरा और कांगड़ा जिले के पालमपुर में स्टोर किया गया है। 
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सेब और नाशपाती उत्पादन पर कुल्लू, शिमला, मंडी और किन्नौर जिलों के बागवानों की आजीविका निर्भर करती है। प्रदेश में बागवानों की आय में बढ़ोतरी के मकसद से लाए गए पौधों को विभाग दिसंबर महीने में आवंटित करना शुरू कर देगा।

विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक इटली से लाए गए सेब और नाशपाति के पौधे की कीमत 300 रुपये है। जिन क्षेत्रों में वर्तमान समय में सेब और नाशपाती का उत्पादन होता है, उन क्षेत्रों के बागवानों के अलावा सूबे के अन्य क्षेत्रों के बागवानों को भी ये पौधे आवंटित किए जाएंगे।
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दो साल में फलने लगता है पौधा

फिलहाल, विभाग पौधे आवंटित करने के लिए बारिश का इंतजार कर रहा है। बागवानी विभाग कांगड़ा के उपनिदेशक डॉ. डीआर वर्मा ने कहा कि इस बार इटली से सेब और नाशपाती के पौधे आयात किए गए हैं। पैदावार बढ़ाने में यह पौधे सहायक होंगे। बारिश होने के तुरंत बाद बागवानों को पौधे देने का क्रम शुरू कर दिया जाएगा।

इटली से लाए गए सेब के पौधों की किस्म दो से तीन साल में फल देना शुरू कर देती है। विश्व बैंक के माध्यम शुरू किए गए इस प्रोजेक्ट के तहत सात साल तक हर साल बागवान को उन्नत किस्म के विदेशी सेब के पौधे उपलब्ध करवाए जाएंगे। इससे उत्पादन तो बढ़ेगा ही, हिमाचल के सेब को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिलेगी।
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