शिमला की कंडा जेल में पांच साल की सजा काट रहा आईएसआईएस आतंकी आबिद खान जेल में इन दिनों फैशनेबल कपड़े डिजाइन कर रहा है। बंगलूरू के रहने वाले आबिद ने फैशन डिजाइनिंग का कोर्स कर रखा है।
उसके इस हुनर हो देखते हुए बंदी सुधार गृह में जेल प्रशासन अन्य कैदियों के बनाए कपड़े भी उससे डिजाइन करा रहा है। जेल प्रशासन उसकी नकारात्मक सोच को भी बदलने का प्रयास कर रहा है।
आबिद को इससे ठीक-ठाक कमाई भी हो रही है। पच्चीस वर्ष के आबिद की गिरफ्तारी पिछले साल 16 दिसंबर को कुल्लू के बंजार में एक चर्च से हुई थी। वहां वह पादरी बनकर रह रहा था।
फैशन डिजाइनिंग का किया है कोर्स
स्थानीय पुलिस ने एनआईए के सहयोग से उसे गिरफ्तार किया। कोर्ट में आबिद ने न सिर्फ अपना गुनाह कबूल किया बल्कि जांच में भी सहयोग किया। इसके चलते 7 माह बाद कोर्ट ने उसे 5 साल व 50 हजार जुर्माने की सजा सुनाई।
इसके बाद से वह शिमला स्थित कंडा जेल में सजा काट रहा है। डीजी जेल का अतिरिक्त कार्यभार देख रहे डीजीपी सोमेश गोयल ने बताया कि जेल में कैदी के सजा काटने से ज्यादा उसके सुधार पर जोर दिया जाता है।
आबिद ने फैशन डिजाइनिंग का कोर्स किया है। उसने पोशाकें बनाने में मदद की ख्वाहिश जताई थी। अब वह बाकी कैदियों के बनाए ड्रेस भी डिजाइन कर रहा है।
हर हाथ को काम का अभियान
डीजीपी सोमेश गोयल
- फोटो : File Photo
डीजीपी गोयल ने बताया कि जेल में आना ही कैदी के लिए सजा के बराबर होता है। इसके बाद रोजाना उस पर सख्ती की जाए तो सुधरने के बजाय वह और बिगड़ सकता है। इसी को देखते हुए हिमाचल की जेलों में हर हाथ को काम अभियान शुरू किया गया है।
जेल में बंद कैदियों को उनकी काबलियत के हिसाब से काम करने के लिए प्रेरित किया जाता है। जिन्हें कुछ नहीं आता, उन्हें रुचि के हिसाब से बढ़ई, वेल्डिंग, सिलाई, बुनाई, खाना बनाने से लेकर कई अन्य तरह के काम सिखाए जाते हैं।
कर्नाटक शिफ्ट करने की की थी मांग
कर्नाटक के बंगलूरू निवासी आबिद खान ने सजा मिलने के बाद आग्रह किया था कि उसे कर्नाटक की किसी जेल में शिफ्ट कर दिया जाए।
उसकी दलील थी कि कर्नाटक का निवासी होने के अलावा उसके माता-पिता काफी बुजुर्ग हैं और वह अविवाहित है। हालांकि, सुरक्षा कारणों के चलते इस पर अभी तक फैसला नहीं हो सका है।