भारत पाकिस्तान मैच के बाद अब आईपीएल के तीन और मैचों की मेजबानी एचपीसीए के हाथों से छिन गई है।
भारत पाकिस्तान मैच के बाद अब आईपीएल के तीन और मैचों की मेजबानी भी एचपीसीए के हाथों से छिन गई है। इसका खुलासा एचपीसीए के प्रवक्ता संजय शर्मा ने धर्मशाला में आयोजित प्रेस वार्ता में किया है। संजय शर्मा ने कहा कि 21 अप्रैल को एचपीसीए ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के कार्यालय को एक पत्र भेजकर उनसे आईपीएल मैचों के लिए सुरक्षा प्रदान करने की मांग की थी।
लेकिन सरकार की ओर से कोई भी लिखित आश्वासन न मिलने के कारण पंजाब किंग्स इलेवन प्रबंधन ने धर्मशाला में क्रिकेट मैच नहीं करवाने का निर्णय लिया है। पंजाब किंग्स इलेवन अब तीनों मैचों का आयोजन अपने घरेलू मैदान मोहाली में ही करवाएगा। किंग्स इलेवन पंजाब ने इसको लेकर आईपीएल गवर्निंग कांउसिल के अध्यक्ष राजीव शुक्ला को जानकारी दे दी है।
प्रदेश सरकार ने पहले टी-20 विश्वकप के दौरान भारत-पाक मैच को शिफ्ट करवाकर धर्मशाला ही नहीं पूरे प्रदेश की किरकिरी करवाई थी। प्रदेश सरकार के नकारात्मक रवैये की वजह से अब धर्मशाला से आईपीएल मैच भी छिन गए हैं।
सरकार ने नहीं दिया लिखित जवाब, छिनी मेजबानी
एचपीसीए स्टेडियम धर्मशाला।
- फोटो : अमर उजाला
संजय शर्मा ने सरकार पर खेल विरोधी होने का आरोप लगाया। संजय ने कहा कि आईपीएल मैचों पर सुरक्षा को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट न करने से एक बार फिर वीरभद्र सरकार ने खेल विरोधी नीति को दर्शाया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने सिर्फ अखबारों में ही सुरक्षा मुहैया करवाने के बयान दिए जबकि लिखित तौर पर कोई गांरटी नही दी गई।
हाल ही में बीसीसीआई ने एचपीसीए को पत्र लिखा था। इसमें बीसीसीआई ने लिखा था कि पंजाब किंग्स इलेवन धर्मशाला में सात, नौ और 15 मई को धर्मशाला स्टेडिय़म में आईपीएल के तीन मैच करवाना चाहता है। संजय के अनुसार पत्र में पंजाब किंग्स इलेवन सुरक्षा को लेकर आश्वासन चाहता था ताकि पहले की तरह कोई विवाद न हो।
सीएम ने 21 मार्च को हमीरपुर के सुजानपुर में कहा था कि उनकी सरकार आईपीएल मैचों का विरोध नहीं करेगी। यहां तक सरकार एचपीसीए को मैचों के आयोजन को लेकर तमाम सुविधाएं देने को सरकार तैयार है। लेकिन, अब दोबारा पत्राचार का जबाव न देकर सरकार ने मंशा जाहिर की है।
कहां गए सीएम राहत कोष में जमा 10 लाख
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह
किंग्स इलेवन के मनोरजंन शुल्क विवाद पर संजय शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार नए फैसले ले सकती है। लेकिन, पूर्व में टैक्स संबंधित नियमों पर छेडख़ानी नहीं कर सकती। इसके बावजूद प्रदेश सरकार ने पंजाब टीम से 10 प्रतिशत की दर से शुल्क वसूला।
दूसरी ओर वीरभद्र सिंह के पुत्र के एनजीओ के खाते में पैसे जमा होते रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि वीरभद्र सरकार ने किंग्स इलेवन पंजाब से दस प्रतिशत शुल्क के तौर पर लिए और मुख्यमंत्री राहत कोष में पैसे जमा कराए। ये पैसे कहां लगाए, इसका सच सीएम को बताना चाहिए।