वर्ष 2010 में संघ की बागडोर महेंद्र सिंह के हाथों में पहुंची। लेकिन इसके कुछ समय बाद ही भारतीय कुश्ती महासंघ से मान्यता हासिल कर वीरेंद्र कश्यप कुर्सी पर काबिज हो गए। वर्ष 2012 में संजय यादव फिर एक बार अपनी याचिका लेकर हाईकोर्ट की डबल बेंच के पास पहुंच गए।
उन्होंने दलील दी थी कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद भी भारतीय कुश्ती महासंघ ने वीरेंद्र कश्यप और कुलदीप राणा को संघ का कार्यभार सौंप दिया है। हिमाचल प्रदेश खेल विभाग व ओलंपिक संघ में महेंद्र सिंह गुट की सदस्यता होने के कारण वर्ष 2012 में उन्होंने महासंघ के इस फैसले को चुनौती दी थी।
जगदीश कुमार और डॉ. संजय दोनों हिमाचल ओलंपिक संघ के धर्मशाला चुनाव में सदस्य बने थे। वर्ष 2014 में प्रदेश ओलंपिक संघ के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर और महासचिव राजेश भंडारी ने उच्च न्यायालय में एक शपथ पत्र दाखिल किया। जिसमें महेंद्र सिंह गुट को हिमाचल में कुश्ती संघ का असली हकदार बताया गया।
वर्तमान में हिमाचल कुश्ती संघ के संयुक्त सचिव और परशुराम अवार्डी डॉ. संजय यादव का कहना है कि कुश्ती संघ राज्य के हर जिले में कुश्ती अकादमी खोलेगा। इसमें बच्चों को ट्रेनिंग दी जाएगी। वहीं हर गांव में कोच तैनात किए जाएंगे। प्रदेश में महिला कुश्ती को विशेष महत्व दिया जाएगा।
कुश्ती संघ के महासचिव जगदीश कुमार ने बताया कि अब संघ पूरे हिमाचल के कुश्ती प्रेमियों को जोड़ने का काम करेगा। उन्होंने कहा कि नेशनल लेवल में कुश्ती प्रतियोगियों के लिए संघ हर सुविधा मुहैया करवाएगा। हिमाचल में कम से कम चार जिलों में सरकार से बात करके अखाड़े खुलवाए जाएंगे।