क्योंकि सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग के 3267 करोड़ के पेयजल प्रोजेक्ट के लिए दो करोड़ की राशि खर्च करके कंसलटेंसी ली है। सवाल यह उठ रहे हैं कि सौ करोड़ की कंसलटेंसी से ऐसी क्या परामर्श ली गई है? सरकार को संदेह है कि कहीं कंसलटेंसी की आड़ में अफसरों की सांठ गांठ से गड़बड़ी तो नहीं की गई।
सरकार इस प्रोजेक्ट से जड़े कई बागवानी अफसरों की कार्यप्रणाली को लेकर भी संदेह कर रही है। इस कारण से बागवानी विभाग के अफसरों पर नकेल कसने की तैयारी की जा रही है। बागवानों के लिए चलाए जा रहे प्रोजेक्ट की राशि का पूरा हिसाब लिया जाना है। इस राशि को कैसे और कहां खर्च किया गया है?
प्रदेश के बागवानी और सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि विश्व से ऋण लेकर हिमाचल के बागवानों के लिए प्रोजेक्ट चलाया गया है। वर्तमान सरकार यह पूरी राशि बागवानों के हितों और बागवानी क्षेत्र के विस्तार के लिए खर्च करेगी।
सरकार यह भी देख रही है कि इस प्रोजेक्ट की आड़ में बागवानी विभाग के अफसरों ने कोई गड़बड़ी तो नहीं की। प्रोजेक्ट जिस मकसद के लिए लाया गया है, उसे पूरा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बागवानों के लिए आई राशि को लुटने नहीं दिया जाएगा।