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प्रदेश के बागवानी विभाग के बेलगाम अफसरों पर कसेगी नकेल

Mon, 06 Aug 2018 01:56 PM IST
विपिन काला, अमर उजाला, शिमला
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राज्य सरकार बागवानी विभाग के बेलगाम अफसरों पर नकेल कसने की तैयारी में है। विश्व बैंक के ऋण से चलाए जाने वाले बागवानी विकास के प्रोजेक्ट की आड़ में की गई धांधली पर प्रदेश सरकार कड़ा रुख अपनाए है। बागवानों के हितों के लिए चलाए जा रहे 1134 करोड़ के इस प्रोजेक्ट का सही मायने में कितना फायदा बागवानों को पहुंचा?

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इसे लेकर भी सरकार विभिन्न पहलुओं की जांच में जुटी है ताकि दोषी अफसरों पर शिकंजा कसा जा सके। राज्य में बागवानों खासकर सेब उत्पादकों को विदेशों से नए पौधे जुटाने के लिए विश्व बैंक से ऋण लेकर  प्रोजेक्ट के तहत काम किया जाना था।

बताते हैं कि हिमाचल के बागवानों के लिए चलाए प्रोजेक्ट के लिए केंद्र सरकार ने कुल 72 फीसदी राशि विश्व बैंक से ऋण के रूप में जुटाई थी। शेष 28 फीसदी राशि प्रदेश सरकार ने विश्व बैंक से बागवानी प्रोजेक्ट के लिए जुटाई है। वर्तमान राज्य सरकार प्रोजेक्ट की 100 करोड़ की कंसलटेंसी को पचा नहीं पा रही है।

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क्या कहते हैं बागवानी मंत्री महेंद्र सिंह

क्योंकि सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग के 3267 करोड़ के पेयजल प्रोजेक्ट के लिए दो करोड़ की राशि खर्च करके कंसलटेंसी ली है। सवाल यह उठ रहे हैं कि सौ करोड़ की कंसलटेंसी से ऐसी क्या परामर्श ली गई है? सरकार को संदेह है कि कहीं कंसलटेंसी की आड़ में अफसरों की सांठ गांठ से गड़बड़ी तो नहीं की गई।

सरकार इस प्रोजेक्ट से जड़े कई बागवानी अफसरों की कार्यप्रणाली को लेकर भी संदेह कर रही है। इस कारण से बागवानी विभाग के अफसरों पर नकेल कसने की तैयारी की जा रही है। बागवानों के लिए चलाए जा रहे प्रोजेक्ट की राशि का पूरा हिसाब लिया जाना है। इस राशि को कैसे और कहां खर्च किया गया है? 

प्रदेश के बागवानी और सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि विश्व से ऋण लेकर हिमाचल के बागवानों के लिए प्रोजेक्ट चलाया गया है। वर्तमान सरकार यह पूरी राशि  बागवानों के हितों और बागवानी क्षेत्र के विस्तार के लिए खर्च करेगी।

सरकार यह भी देख रही है कि इस प्रोजेक्ट की आड़ में बागवानी विभाग के अफसरों ने कोई गड़बड़ी तो नहीं की। प्रोजेक्ट जिस मकसद के लिए लाया गया है, उसे पूरा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बागवानों के लिए आई राशि को लुटने नहीं दिया जाएगा।
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