अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव की दूसरी जलेब शनिवार को पारंपरिक अंदाज में निकली। ढोल-नगाड़ों की ताल पर झूमते देवी-देवताओं के रथों और नाचते गाते देवलुओं से छोटी काशी भक्तिरस में डूबी दिखी। राजदेवता माधोराय की दूसरी शाही जलेब में मंदिर में पूजा-अर्चना करने के बाद जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ने शिरकत की। सबसे पहले चंबा के सांस्कृतिक दल और मडियाहला यानी मुखौटा नृत्य करते हुए कलाकार जलेब के आगे चले।
उसके पीछे घुड़सवार, पुलिस बैंड और पुलिस के जवान चले। बालीचौकी क्षेत्र के देवता छानणू-झमाहूं की जोड़ी ढोल-नगाड़ों की लय पर झूमते हुए सबसे आगे चली। इसके पश्चात देव कोटलू नारायण, देव सरोली मार्कंडेय, देव शैटी नाग, देवी डाहर की अंबिका, देव विष्णु मतलोड़ा, देव मगरू महादेव, देव चपलांदू नाग, श्रीदेव बायला नारायण, देव बिट्ठू नारायण, देव लक्ष्मीनारायण पखरोल, चौहारघाटी के देव हुरंग नारायण, देव घड़ौनी नारायण, देव पशाकोट नारायण, देव पेखरू का गहरी, देव चुंजवाला शिव, देव तुंगासी ब्रम्हा, देवी सरस्वती महामाया, देवी नाऊ अंबिका के बाद राज माधोराय की चांदी की कुर्सी और उसके पीछे राजदेवता की पालकी चल रही थी। राजदेवता माधोराय की पालकी के पीछे देव शुकदेव डगाहंढु, देव शुकदेव मड़घयाल, देव जलौणी गणपति, देव शेषनाग टेपर, देव झाथीवीर और देव टूंडीवीर शामिल रहे। आठ मार्च को मेले का समापन राज्यपाल करेंगे।
देव परंपरा टूटी : ‘रसाले’ के आगे चला दिए सांस्कृतिक दल
मध्य जलेब के राजदेवता माधोराय की जलेब में इस बार रसालों के आगे ही सांस्कृतिक दल चला दिए। परंपरा रही है कि पुलिस के घुड़सवारों को जलेब में सबसे आगे चलाया जाता है। इन्हें स्थानीय बोली में ‘रसाले’ कहा जाता है। जिला प्रशासन द्वारा प्रकाशित की गई शिवरात्रि मार्गदर्शिका में भी इस बात का उल्लेख किया गया है कि राजदेवता माधोराय की जलेब में सबसे आगे पुलिस के घुड़सवार, होमगार्ड बैंड, पुलिस के जवान शामिल रहेंगे। दूसरी जलेब के मुख्य अतिथि जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह भी जलेब में पैदल शामिल न होकर मुख्यमंत्री की तरह खुली जीप में सवार हुए। इस बात को लेकर भी शहर में चर्चा रही।