हिमाचल प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता होने का दावा करने वाली सरकार अपनी आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था के लिए कतई चिंतित नहीं है। सरकार की लापरवाही का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले डेढ़ साल में गृह विभाग प्रदेश की आंतरिक सुरक्षा का रिव्यू करने के लिए बैठक तक नहीं कर सका।
यह तब है जब हिमाचल के आसपास लगातार आतंकी गतिविधियां हो रही है। यही नहीं, केंद्रीय एजेंसियां भी लगातार सुरक्षा संबंधी इनपुट भेजती रहती है। सामान्य तौर पर केंद्रीय एजेंसियों के इनपुट के आधार पर प्रदेश में हर साल सुरक्षा रिव्यू की एक बैठक आयोजित होती है। इस बैठक में इनपुट के आधार पर वीआईपी स्थानों, हस्तियों व प्रोजेक्टों की सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव किया जाता है।
लेकिन हिमाचल प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार गंभीर नहीं है। हर साल कम से कम एक बार होने वाली आंतरिक सुरक्षा संबंधी बैठक 2014 के बाद से हुई ही नहीं है। यह तब है जब हाल ही में पठानकोट में आतंकी हमले के दौरान व बाद में केंद्रीय जांच एजेंसियों ने कई बार प्रदेश को इनपुट भेजे।
इनमें बार्डर एरिया सिक्योरिटी व पावर प्रोजेक्टों और बौद्घ स्थलों की सुरक्षा से संबंधित इनपुट भी शामिल है। लेकिन सिक्योरिटी एलर्ट व इनपुट के बावजूद खुद मुख्यमंत्री के अधीन आने वाले गृह विभाग की यह बैठक पिछले डेढ़ साल से नहीं हुई है।
हाल में पठानकोट हमले के दौरान कई तरह के एलर्ट व इनपुट के बावजूद गृह विभाग अब तक बैठक कर सुरक्षा का खाका तैयार नहीं कर सका है। फिलहाल पुलिस अपने स्तर और विवेक से प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव कर सुरक्षा का जिम्मा संभाले हुए है।