मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन होने की वजह से अब हाटी समुदाय के लोगों को प्रमाण पत्र लेने के लिए कोर्ट के निर्णय का इंतजार करना पड़ेगा। गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के ट्रांसगिरी क्षेत्र में हाटी समुदाय के लोग 1967 से उत्तराखंड के जौनसार बाबर को जनजातीय दर्जा मिलने के बाद से संघर्ष कर रहे हैं। कई वर्षों तक लगातार संघर्ष के बाद केंद्रीय कैबिनेट ने हाटी समुदाय की मांग को 14 सितंबर 2022 को अपनी मंजूरी दी थी।
उसके बाद केंद्र सरकार ने 16 दिसंबर 2022 को इस विधेयक को लोकसभा में पारित करवाया। उसके बाद यह विधेयक राज्यसभा से भी पारित हो गया। राज्यसभा में पारित होने के बाद इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा गया। राष्ट्रपति ने 9 दिनों के अंदर ही विधेयक पर मुहर लगा दी। हाटी समुदाय में करीब 2 लाख लोग 4 विधानसभा क्षेत्र शिलाई, रेणुका, पच्छाद और पांवटा साहिब में रहते हैं। जिला सिरमौर की कुल 269 पचायतों में से ट्रांसगिरी में 154 पंचायतें आती हैं। इन 154 पंचायतों की 14 जातियों तथा उप-जातियों को एसटी संशोधित विधेयक में शामिल किया गया है।